कोलकाता से मंगाए गए गुलाब और रजनीगंधा के फूलों से मां को सजाया गया। मांगटीका, नथिया, स्वर्ण मुकुट और विशेष फाटा हार के साथ स्वर्ण-रजत युक्त मोती की लड़ियों से मां का अप्रतिम शृंगार हुआ। विविध नैवेद्य, फल, मिष्ठान व पकवानों का भोग लगाकर आरती हुई। इसके बाद मंदिर का कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया गया। दर्शन का क्रम देर रात तक चला।
संगीत समारोह में प्रख्यात भजन गायक गोपाल राय, विजय कपूर, जौनपुर की भावना सिंह, कल्पना सिंह, विदुषी वर्मा, करिश्मा पांडेय, पीयूष मिश्र, ज्योति माही, पवन परदेशी, ममता शर्मा, नियति वर्मा, प्रियंका पांडेय, अंजली ऊर्वशी आदि कलाकारों ने मां की स्वराधना की।
उन्होंने जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी..., अम्बे चरण कमल है तेरे..., कैसे नाही इठलाऊं मेरी मईया है आयी..., लहरे लाहरदरवा कोहरवा... आदि देवी गीत और पचरा सुनाकर मां के चरण पखारे। संगत कलाकारों में तबले पर मोतीलाल शर्मा, ढोलक पर सोनू, कीबोर्ड पर नीरज, रामाश्रय, शिवांश, पैड पर राहुल, बैंजो पर जियाराम रहे। कलाकारों का स्वागत कौशलपति द्विवेदी, बिंदु दुबे, सोनू झा तथा संयोजन एवं संचालन प्रभुनाथ राय दाढ़ी ने किया।
आयोजन में प्रस्तुति देतीं कलाकार।
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12 घंटे चला भंडारा, 15 हजार से अधिक ने ग्रहण किया प्रसाद
शृंगार महोत्सव के अंतिम दिन मंदिर परिसर में अखंड भंडारा 12 घंटे चला, जो दोपहर 12 बजे मां की भोग आरती के बाद शुरू हुआ और रात 12 बजे तक अनवरत चला। पं. विशेश्वर झा सोनू ने बताया कि इस अखंड भंडारे में 15 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मां के भोग प्रसाद को ग्रहण करने के लिए दोपहर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही, जो देर रात तक चलती रही।