आनंदकानन में रहता है भगवान शिव का पूरा परिवार, सावन में ऋषि सारंगनाथ के साथ सारनाथ में विराजते हैं बाबा विश्वनाथ
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। सर्वार्थानामत्र दात्री भवानी सर्वान् कामान् पूरयेदत्र दुण्ढिः, सर्वान् जन्तून् मोचयेदन्तकाले विश्वेशोऽत्र श्रोत्रमन्त्रोपदेशात्।। अर्थात इस काशीधाम में सब अर्थों को पूर्ण करनेवाली भवानी श्री अन्नपूर्णा हैं। समस्त कामनाओं को सिद्ध करने वाले ढुंढिराज गणेश हैं और भगवान विश्वनाथ अंत समय में सब जंतुओं को कान में मंत्र देकर (भव-बंधन) से मुक्त कर देते हैं।
भगवान शिव की सर्वप्रिय नगरी काशी में भक्तों को भगवान सपरिवार दर्शन देते हैं। एक तरफ सब अर्थों को पूर्ण करने वाली भवानी अन्नपूर्णा तो दूसरी तरफ सब कार्यों को सिद्ध करने वाले भगवान ढुंढिराज गणेश हैं। अंत समय में भगवान विश्वनाथ सबको मुक्ति प्रदान करते हैं। मां अन्नपूर्णा और ढुंढिराज का विग्रह विश्वनाथ गली में है। अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी ने बताया कि भगवान विश्वनाथ ने काशी को अकाल से मुक्त करने के लिए मां अन्नपूर्णा से अन्न-धन की भिक्षा मांगी थी। बाबा विश्वनाथ मां अन्नपूर्णा के साथ काशी में गृहस्थ स्वरूप में हैं और उनकी अर्धांगिनी के स्वरूप में मां अन्नपूर्णा काशी में विराजमान हैं। भगवान ढुंढिराज काशी आए। दिवोदास से काशी ढुंढिराज को मिली और भगवान शिव जब काशी आए तो उन्होंने ढुंढिराज की स्तुति की। वह ब्रह्मांड के प्रथम पुत्र हैं जिनकी पिता ने स्तुति की। उन्होंने 56 स्वरूप धारण किया और वह काशी के युवराज के रूप में विराजमान हैं। भगवान कार्तिकेय काशी के हर तीर्थ पर विराजमान हैं। उन्होंने ही अगस्तय मुनि से स्कंदपुराण की कथा कही जिसे वेदव्यास ने लिखा। भगवान कार्तिकेय के बिना काशी की कोई कथा पूर्ण नहीं हो सकती है।
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि सारंगनाथ महादेव मंदिर में भगवान शिव अपने साले ऋषि सारंगनाथ के साथ विराजमान हैं। मान्यता है कि सावन में काशीपुराधिपति काशी छोड़कर यहीं पर निवास करते हैं। सावन में सारंगनाथ के दर्शन पूजन और जलाभिषेक से उतना ही पुण्य मिलता है। जितना काशी विश्वनाथ मंदिर में मिलता है।