लालबहादुर शास्त्री एयरपोर्ट वाराणसी पर पद्मश्री और बीएचयू के पूर्व कुलपति डा. लालजी सिंह को दिल का दौरा पड़ने पर उन्हें व्हील चेयर व एंबुलेंस मुहैया नहीं करायी गई।
डॉ. लालजी सिंह के भतीजे अरुण सिंह ने कहा उन्होंने पूर्व में सूचना भी दी, बावजूद इसके लापरवाही बरती गई। प्राथमिक चिकित्सा और इलाज में देरी की वजह से डॉ. लालजी सिंह की मौत हो गई।
अरुण सिंह ने कहा कि तेरही के बाद वह कानूनी राय लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ केस करेंगे। अरुण सिंह ने आरोप लगाया है कि रविवार की सायं डॉ. लालजी सिंह को इंडिगो की 5.50 बजे वाली फ्लाइट से हैदराबाद जाना था।
घर से ही फोन पर फ्लाइट के कार्यालय को ह्वील चेयर की मदद मांगी गई थी। लगभग आधे घंटे बाद व्यवस्था बनी तो उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया गया। उनके यह बताने पर कि उनके बड़े पिता लालजी सिंह का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, उन्हें उनकी जरूरत है।
अन्यथा वे प्लेन तक नहीं पहुँच पाएंगे लेकिन अफसरों ने एक नहीं सुनी। यह जानते हुए कि वे बीएचयू के पूर्व कुलपति रह चुके हैं। लाचार होकर उन्होंने एक दूसरी कंपनी के आफिस में जाकर मदद मांगी।
संयोग से काउंटर पर बैठा बाबू लालजी सिंह का छात्र रह चुका था। उसने रिस्क लेते हुए अपनी कंपनी से डिपार्चर पास दिलाया। अंदर उन्होंने देखा कि डॉ. लालजी सिंह को तत्काल चिकित्सीय सुविधा की जरूरत थी।
काउंटर पर वहाँ न तो कोई मेडिकल आफिसर उपलब्ध हुआ और न ही एक अदद टैबलेट देने वाला कोई जिम्मेदार। आधे घंटे बाद भी न तो एंबुलेंस मिल सकी और न ही सांस की तकलीफ दूर करने के लिए जरूरी आक्सीजन सिलेंडर मिला।
मजबूर होकर वह अपने वाहन से लालजी सिंह को लेकर वाराणसी के सर सुंदर लाल अस्पताल पहुंचे। एयरपोर्ट निदेशक अनिल कुमार राय का कहना है कि एयरपोर्ट पर इमरजेंसी में जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वह यात्रियों को समय से उपलब्ध कराई जाती हैं। हालांकि डॉ. लालजी के परिजनों की तरफ से किसी प्रकार की मेडिकल सुविधा की मांग नहीं की गई थी। फिर भी शिकायत आई तो जांच करवाई जाएगी।