नगर निगम की ओर से शहर की सफाई पर पहले से अधिक ध्यान दिया जा रहा है। 5000 कर्मचारी सफाई में जुटे हैं। पॉलीथिन के उत्पादन पर रोक लगनी चाहिए। कहीं भी कूड़ा फेंकने वालों पर पेनाल्टी लगाई जानी चाहिए। - अमरदेव यादव, पार्षद सपा
स्कूली बच्चों के माध्यम से शहर को सफाई व्यवस्था के प्रति जागरूक करना पड़ेगा। हमें अपनी आदतों में परिवर्तन लाना होगा। जिस प्रकार घर की सफाई पर ध्यान होता है। उसी प्रकार शहर पर ध्यान देना होगा। - अनूप जायसवाल, अध्यक्ष, प्रणाम वंदेमातरम समिति
शहर की सफाई व्यवस्था के लिए जितना पेनाल्टी लगाना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि जो लोग स्वच्छता के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें सराहा जाए। । शहर में ग्रीन इनिशिएटिव पर काम करना होगा। गंगा घाटों को प्लास्टिक फ्री बनाना होगा। - दिव्यांशु, सचिव होम वेलफेयर ट्रस्ट
जब तक हम जागरूक नहीं होंगे तब तक शहर साफ नहीं होगा। हमें खुद आपने आसपास सफाई रखनी होगी। शॉपिंग के लिए हम बाजार जाएं तो घर से कपड़े के झोले लेकर जाए। दुकानदारों से हम खुद प्लास्टिक में कोई सामान न लें। - रजनीश कन्नौजिया, उपाध्यक्ष, महानगर उद्योग व्यापार समिति
मेडिकल वेस्ट पर काम होना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण पर और बेहतर काम होना चाहिए। कई अस्पतालों में अब भी इंजेक्शन लगाने बाद रुई और वॉयल यहां-वहां फेंक दिया जाता है। शहर में पौधरोपण की जिम्मेदारी भी आम जनता की होनी चाहिए। - अमन कबीर, सामाजिक कार्यकर्ता
स्नान के बाद लोग कपड़े घाट पर छोड़ देते हैं। इसे रिसाइकल करने की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं को आगे आना चाहिए। इन कपड़ों के झोले और दूसरे जरूरत के सामान बनाए जाने चाहिए। - नितेश जायसवाल, होम वेलफेयर ट्रस्ट
शहर को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए जरूरी है कि इसके उत्पादन पर ही रोक लगाई जाए। शहर में प्लास्टिक के प्रतिबंध पर निगरानी की जानी चाहिए। प्लास्टिक का इस्तेमाल करते पाए जाने पर पेनाल्टी लगाई जानी चाहिए। - आदित्य गोयनका, सदस्य, प्रणाम वंदेमातरम समिति
प्राचीन मंदिरों की लगातार सफाई कराई जा रही है। पंचक्रोशी मार्ग के मंदिरों को सफाई कराया जा रहा है। लेकिन, समस्या ये है कि कुछ लोग इसकी जिम्मेदारी ले रहे हैं, बाकी लोग गंदगी कर रहे हैं। शहर को साफ सुथरा रखने का दायित्व कर नागरिक का है। - अमित त्रिवेदी, सह संस्थापक शिवधाम फाउंडेशन
महाकुंभ में झोला बांटकर प्लास्टिक फ्री का संदेश दिया गया। ऐसे ही छोटे-छोटे प्रयासों से ही हम शहर को प्लास्टिक मुक्त कर सकते हैं। प्रशासन और सरकार अपने स्तर से काम कर रही है। हमें भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। प्लास्टिक का पूरी तरह से बहिष्कार करना होगा। - विकास दीक्षित, न्यासी, बीडीआरएफ फाउंडेशन
सभी के सहयोग से ही हम इंदौर से आगे निकल सकते हैं। काशी की पहचान अंतरराष्ट्रीय बन चुकी है। ऐसे में जरूरी है कि यहां की सफाई व्यवस्था भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की होनी हिए। इसमें हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी। - विपिन अग्रवाल, अध्यक्ष, औद्योगिक आस्थान सहकारी समिति
बीमारी और गंदगी एक दूसरे के पर्याय हैं। कम्युनिटी एप्रोच के साथ सेल्फ एप्रोच हो। रविवार को ड्राई डे मनाएं। अपने घर से 150 मीटर परिधि में सफाई करें ताकि मच्छर न पनपे। स्वच्छता की शपथ लेने के साथ उस पर अमल भी करना होगा। - डॉ. शरत चंद पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी