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नोकझोंक के बीच रामानंद की महंतई रस्म

Sat, 30 Jul 2016 02:16 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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स्वामी रामानंद सरस्वती
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माधवाश्रम मठ की महंतई रस्म पगड़ी शुक्रवार को नोकझोंक और हंगामे के बीच पूरी हुई। मठ में रस्म पगड़ी के लिए पूजा की थाल सजा कर लाए जाने के बाद ही एक व्यक्ति ने रस्म का विरोध शुरू कर दिया। उसका कहना था कि जिस संन्यासी का नाम महंत के लिए प्रस्तावित है, वह उपयुक्त नहीं हैं। किसी ब्रह्मचारी को महंतई की गद्दी सौंपी जानी चाहिए। शिष्यों के पुरजोर समर्थन और संतों की सहमति के चलते उसकी नहीं चली और स्वामी रामानंद सरस्वती को महंत घोषित कर दिया गया।
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दिन के करीब 11 बजे बांसफाटक स्थित माधवाश्रम में सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज की मौजूदगी में महंतई की रस्म पगड़ी पूरी की गई। नरेंद्रानंद के पादुका पूजन के बाद महंतई चादर की रस्म शुरू होने वाली थी, तभी शांतनु नामक एक व्यक्ति विरोध करने लगा। उसने महंत के कक्ष पर ताला जड़ दिया था। इस दौरान सैकड़ों शिष्यों और संतों ने एक स्वर से रामानंद को महंत बनाए जाने का समर्थन किया।

इसके बाद महंतई की चादर ओढ़ाई गई। विरोध करने वालों ने चाभी संतों को सौंप दी। इस मौके पर वाणेश्वरानंद तीर्थ, स्वामी प्रकाश देव आश्रम, स्वामी श्यामदेव आश्रम, रणछोड़ आश्रम, स्वामी बैताल गिरि, स्वामी तूफान गिरि समेत 40 मठों के महंतों ने चादर-टीका किया।  
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