यही कारण है कि इस पूरे विभाग में पीड़ितों को सुनने वाला कोई नहीं है। किसी भी व्यक्ति को किसी तरह की शिकायत हो तो सीधे मुझसे संपर्क कर सकता है। पीड़ितों के मामलों की जांच कराई जाएगी और उसमें नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।-ईशा दुहन, वीडीए वीसी
केस-1
सिगरा निवासी डॉ. मुकेश राय ने वर्ष 2009 में वाराणसी विकास प्राधिकरण के हबीबपुरा आवासीय योजना में प्लाट नंबर 12 को बोली के जरिए खरीदा और 15.90 लाख रुपये बैंक लोन के जरिए जमा किया। 13 वर्ष से लगातार वे वीडीए से अपने प्लाट पर कब्जा दिलाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, मगर अधिकारी हर बार उन्हें आश्वासन देकर लौटा रहे हैं। डॉ. मुकेश का कहना है कि बैंक लोन लेकर एक अदद घर बनाने का सपना संजोया था, मगर वीडीए अफसरों की लापरवाही के चलते 13 साल बाद भी खाली हाथ हैं।
केस-2
धौकलगंज निवासी नीलम जायसवाल ने वीडीए के ई आक्शन की सूचना पर उन्होंने ले आउट के लिए कार्यालय में संपर्क किया। छह सितंबर 2021 को ई नीलामी में उन्होंने बड़ालालपुर में ई 28 प्लाट पर बोली लगाई और उन्हें यह आवंटित हो गया। उन्होंने छह लाख 20 हजार 100 रुपये जमा कर दिया। नक्शा देखा तो पता लगा कि यह भूखंड त्रिमुखाकार है और हाईटेंशन लाइन गुजरी है। इसके बाद नीलम ने प्लाट न लेकर अग्रिम धनराशि वापस मांगी। मगर, छह महीने बीत जाने के बाद अब तक वीडीए की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।