इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के खस्ताहाल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की जांच का निर्देश दिया है। डीएम वाराणसी से कहा है कि वह बीएसए के साथ स्कूलों की जांच कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में दें। स्कूलों की खराब दशा को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि जर्जर हो चुके स्कूल भवनों में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा का तत्काल इंतजाम किया जाए।
जनअधिकार मंच की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ ने यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया है कि संस्था की ओर से बनारस के 17 प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण में सामने आया कि कई स्कूल काफी खराब हालत में हैं और उनका भवन कभी भी गिर सकता है। कुछ स्कूल ऐसे हैं जो एक ही कमरे में चल रहे हैं।
याची संस्था का कहना है कि औसानगंज का एक स्कूल एक ही कमरे में संचालित हैं। वहां सुविधाओं के नाम पर पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। एक ही कमरे में 70 बच्चे जो कक्षा एक से पांच तक में पढ़ते हैं बैठते हैं और तीन अध्यापक उनको पढ़ाते हैं। इसी प्रकार से प्राइमरी स्कूल बुलानाला में 45 बच्चे एक ही कमरे में पढ़ते हैं।
औसानगंज, सोनारपुर, राजघाट, रामघाट, पीली कोठी, मछोदरी, कमलागढ़, काल भैरव, दुर्गाघाट आदि विद्यालयों में सुविधाओं की कमी है। गणेश महल स्थित विद्यालय में भी एक ही कमरा है। बच्चों की संख्या 53 है। जगतगंज के स्कूल में टीन शेड के नीचे 45 बच्चे पढ़ते हैं। मैत्री मठ विद्यालय का भवन काफी जर्जर हालत में है। यहां 50 बच्चे हैं। लक्खीघाट में दो कमरों में 90 बच्चे हैं।
इन स्कूलों की हालत काफी जर्जर है और भवन कभी भी गिर सकता है। जिससे यहां पढ़ रहे बच्चों और अध्यापकों को खतरा हो सकता है। कोर्ट ने डीएम को इन विद्यालयों की जांच करने और बच्चों की सुरक्षा का इंतजाम करने का निर्देश दिया है।