महाशिवरात्रि पर भक्तों के लिए बनने वाला संयोग बेहद खास है। सर्वार्थ सिद्धि योग भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करेगा वहीं शनि प्रदोष शनिदेव की कृपा बरसाएगा। काशी के ज्योतिषाचार्यों की मानें तो महाशिवरात्रि पर वर्षों बाद बन रहे संयोग में भगवान शिव की आराधना और व्रत से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 18 फरवरी 2023 शनिवार को रात 8 बजकर दो मिनट से अगले दिन 19 फरवरी को शाम चार बजकर 18 मिनट तक रहेगी। महाशिवरात्रि के लिए निशिथ काल पूजा का मुहूर्त चतुर्दशी तिथि में होना आवश्यक है इसलिए महाशिवरात्रि 18 फरवरी को ही मनाई जाएगी।
महाशिवरात्रि के दिन ही शनि प्रदोष व्रत भी है। इसके साथ ही शंख योग, सर्वार्थ सिद्धि का संयोग बन रहा है। इन शुभ योगों में किए गए पूजा-पाठ और कार्यों का कई गुना अधिक फल मिलता है। महाशिवरात्रि पर शनिदेव मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान रहेंगे। सूर्यदेव अपने पुत्र शनि की राशि कुंभ में चंद्रमा के साथ गोचर करेंगे। त्रिग्रही योग शिव भक्तों के लिए खास लाभकारी होगी। शनिदेव अपनी प्रिय राशि कुंभ में अस्त होंगे। जातकों के लिए यह योग कॅरियर और आर्थिक मामलों की दृष्टि से बेहतर रहेगा। महाशिवरात्रि का व्रत रखने और शिवजी की पूजा करने से जातकों के शनि के सभी दोष दूर होंगे और हर मनोकामना पूरी होगी।
MahaShivratri
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पूजन मुहूर्त
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक और भगवान शिव का पूजा के लिए दिन भर मुहूर्त है। जो लोग निशिथ काल में पूजा करना चाहते हैं, उनके लिए रात 12:09 मिनट से रात एक बजे तक का मुहूर्त बन रहा है। शिवलिंग पर शुद्ध जल और बिल्व पत्र अर्पित करके ऊं नम: शिवाय का जाप करने मात्र से ही शिव प्रसन्न हो जाते हैं।
गुरु और शुक्र की बन रही युति
ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि महाशिवरात्रि पर गुरु मीन राशि और शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में गोचर करेंगे। गुरु और शुक्र की यह युति मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि वालों के लिए हंस और मालव्य योग का निर्माण करा रही है। वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों के लिए शश योग, मेष, कर्क, तुला और मकर राशि वालों के लिए सामान्य फलदायी रहेगा।