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हादसे से सबकः वाराणसी के सभी चिन्हित जर्जर भवनों को एक हफ्ते में किया जाए ध्वस्त, डीएम ने जारी किए आदेश

Tue, 01 Jun 2021 04:28 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी

सार

वाराणसी शहर में 298 जर्जर भवन हैं जो कभी भी हादसे के कारण बन सकते हैं। नगर निगम के रिकार्ड में वर्तमान में पांचों जोन मिलाकर 298 जर्जर भवन हैं। इनमें सर्वाधिक जर्जर भवन दशाश्वमेध व कोतवाली जोन में हैं। इनके आसपास से गुजरते समय लोगों के मन में भय बना रहता है कि कहीं ये गिर न जाएं।
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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में जर्जर मकान गिरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 श्रीकाशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर में मंगलवार तड़के जर्जर मकान गिरने से दो मजदूरों की मौत के बाद वाराणसी प्रशासन हरकत में आया। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने  सभी चिन्हित जर्जर भवनों को एक हफ्ते के अंदर धवस्त करने का आदेश जारी कर दिया। डीएम ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि शहर में काफी संख्या में जर्जर भवनों का सर्वे नगर निगम द्वारा कराया गया है।

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उक्त जर्जर भवनों के भवन स्वामियों को ध्वस्तीकरण कराने हेतु पूर्व में नोटिस जारी किया गया है। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं है। वर्तमान में मौसम के दृष्टिगत ऐसे मकानों  में रहने वाले सदस्य एवं आस-पास के घर सुरक्षित नहीं हैं। ऐसी दशा में यह आवश्यक है कि संबंधित भवन स्वामियों द्वारा अपने-अपने जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण का कार्य स्वयं के खर्च पर एक सप्ताह में पूर्ण कराया जाए।

यदि भवन स्वामी तय समय में ऐसा नहीं करते हैं तो नगर निगम द्वारा इस कार्य को कराया जाए। साथ ही  खर्च की वसूली संबंधित भवन स्वामी से कराया जाए। इसके साथ ही अभी तक जिन जर्जर भवनों को नोटिस नहीं दिया गया है उन्हें दो दिन के अंदर नोटिस निर्गत करते हुए ध्वस्तीकरण की कार्यवाही पूर्ण कराई जाए।
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डीएम ने निर्देशित किया है कि  जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्यवाही एक सप्ताह में पूर्ण कराना सुनिश्चित करायें। इसके साथ ही डीएम ने ये रिपोर्ट मांगी है कि जोनवार ऐसे कितने भवनों को तकनीकी नोटिस दिया जा चुका है और कितना लंबित है। 

हादसे को दावत देते वाराणसी के 298 जर्जर भवन

वाराणसी शहर में 298 जर्जर भवन हैं जो कभी भी हादसे के कारण बन सकते हैं। नगर निगम के रिकार्ड में वर्तमान में पांचों जोन मिलाकर 298 जर्जर भवन हैं। इनमें सर्वाधिक जर्जर भवन दशाश्वमेध व कोतवाली जोन में हैं। इनके आसपास से गुजरते समय लोगों के मन में भय बना रहता है कि कहीं ये गिर न जाएं। कई मकान तो दूसरे भवनों के सहारे खड़े हैं। फिर भी ऐसे मकानों में लोग रह रहे हैं।

पुराना शहर होने के कारण संकरी गलियों में रोज हजारों लोगों का आना-जाना लगा रहता है। कई गलियों की हालत तो ऐसी है कि वहां दो बाइक एक साथ नहीं जा सकतीं हैं। गलियों में स्थित जर्जर मकानों में लोग रहते हैं, जबकि नगर निगम 100 से 150 वर्ष पुराने भवनों को जर्जर घोषित करने के साथ नोटिस भेज चुका है।

नोटिस मिलने के बावजूद जर्जर भवनों में रह रहे लोग खाली नहीं कर रहे हैं। ऐसे सरकारी व निजी भवनों को लेकर सरकार ने तोड़ने का आदेश दिया है ताकि हादसे रोके जा सकें, लेकिन कानूनी पेच में नगर निगम के हाथ बंधे हैं और ऐसे भवन हादसे को दावत दे रहे हैं। 
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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में जर्जर मकान एक हिस्सा गिरा, दो की मौत

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित गोयनका छात्रावास का एक हिस्सा गिरने से मंगलवार तड़के दो मजदूरों की मौत हो गई। वहीं  एक की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। छह को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया। उन्होंने मंडलायुक्त से फोन पर बात कर घटना की जानकारी ली और पीड़ितों को हर संभव मदद करने का निर्देश दिया। इधऱ, विश्वनाथ मंदिर ने मृतकों के परिजनों को पांच लाख और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद की। 
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