अफगानिस्तान की पहाड़ियों से टकराकर रेतीली गर्म हवाएं यूपी में प्रवेश कर गई हैं। गुरुवार को पूर्वांचल हिट वेव की चपेट में आ गया। इससे मार्च में ही अप्रैल जैसी गर्मी पड़ने लगी। करीब 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से बही पछुआ हवाएं दिन भर बहती रहीं।
रिक्शा-ट्राली खींचते मजदूर पसीने से तर नजर आए। बीएचयू के मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 2 अप्रैल तक पश्चिमी विक्षोभ की एक ब्रांच सक्रिय होने की उम्मीद है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के साथ नम हवा और बादलों के आने से तापमान में गिरावट आ सकती है। अभी कम तीन दिन तक इसी तरह मौसम गर्म रहेगा।
अमूमन 15 अप्रैल के बाद पड़ने वाली गर्मी अभी से शुरू हो गई है। लू के थपेड़ों के साथ आ रही रेतीली गर्म हवाओं का स्रोत भी बहुत दूर है। बीएचयू के मौसम विशेषज्ञ प्रो. एसएन पांडेय बताते हैं कि दक्षिणी मध्यप्रदेश, राजस्थान से लेकर आसपास के राज्यों तक के इलाके गर्म हवाओं की चपेट में हैं।
अफगानिस्तान से चलकर दुबई होते हुए रेतीली गर्म हवाएं यूपी में भी आ गई हैं। बीएचयू के मौसम विशेषज्ञ डॉ. राजीव भाटला बताते हैं कि समय से पहले गर्मी अधिक पड़ने से इस बार मानसून के कमजोर होने के भी संकेत मिलने लगे हैं।
बाबतपुर मौसम केंद्र के अनुसार गुरुवार को अधिकतम तापमान 41.05 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21.7 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। यह मार्च महीने में पिछले सात वर्षों से सर्वाधिक तापमान से अभी 0.9 डिग्री सेल्सियस नीचे है। 2010 में 27 मार्च को 42.4 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया था।
2016- 31 मार्च को 40.00 डिग्री सेल्सियस
1015 29 मार्च 37.09 डिग्री सेल्सियस
2014 29 मार्च 38.4 डिग्री सेल्सियस
2013 20 मार्च 36. 7डिग्री सेल्सियस
2012 22 मार्च 40 डिग्री सेल्सियस
2011 19 मार्च 39.6 डिग्री सेल्सियस
2010 27 मार्च 42. 4 डिग्री सेल्सियस