जौनपुर में स्लाटर हाऊस को सील किए जाने के दूसरे दिन शुक्रवार को अल्पसंख्यकों के बीच कुछ लोगों ने विवादित पर्चे बांटे। इसे लेकर खुफिया विभाग अलर्ट हो गया है। एसपी ने मामले में जांच बैठाकर पर्चा बांटने वालों को चिह्नित करने का निर्देश दिया है। उधर अल्पसंख्यकों ने स्लाटर हाउस बंद करने पर खुशी जताई।
बता दें कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर जौनपुर नगरपालिका परिषद ने गुरुवार को एक स्लाटर हाऊस को सील कर दिया था। इसके सील होने के दूसरे दिन ही पर्चे बांटे जाने को इस घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों की माने तो पर्चे में लिखा है कि 31 मार्च 2014 तक भारत में 1632 कसाई खाने थे, जिसमें सबसे अधिक महाराष्ट्र में थे। इसके अलावा मवेशियों की गणना, सींग, खुर, चमड़ी, रक्त, चर्बी, पूंछ के बाल, आंते, ग्रंथियां, हड़्डी के बारे में विस्तार से बताया गया है। यह पर्चा किन लोगों ने बांटा, यह कोई बताने को तैयार नहीं हैं।
उधर स्लाटर हाऊस को बंद करने का शहर में सभी लोगों का समर्थन मिल रहा है। इमरान खान ने कहा है कि स्वच्छ गोमती अभियान द्वारा उच्च न्यायालय में वाद दायर कर स्लाटर हाऊस को बंद कराना सराहनीय कदम है।
इससे स्थानीय लोगों को गंदगी, बदबू और महामारी से राहत मिली है। आसिफ इकबाल का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण व गोमती नदी में प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी। डा. नोमान खान का कहना है कि स्लाटर हाऊस के कारण विभिन्न प्रकार की बीमारियों का भी सामना लोगों को करना पड़ रहा था।
स्थानीय लोगों ने उधर आने जाने के लिए रास्ता बदल दिया था।
स्वच्छ गोमती अभियान की बैठक संयोजक डा. रजवीर सिंह की अध्यक्षता में हुसैनाबाद स्थित उनके आवास पर शुक्रवार को हुई। जिसमें सदस्यों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।
अभियान के महामंत्री विकास शर्मा ने कहा कि 1952 से संचालित स्लाटर हाऊस को बंद कराया जाना ऐतिहासिक निर्णय है।