बिहार में शराबबंदी के बाद पीने वालों की शामत आ गई थी लेकिन अब उन्होंने इससे बचने का नायाब तरीका खोज लिया है। जी हां बिहार के शराबियों का नया ठिकाना बन गया है यूपी-बिहार बार्डर।
दोनों राज्यों की सीमा पर शराब की दुकानों को नए लाइसेंस देकर यूपी का आबकारी विभाग अपना राजस्व बढ़ाने में लगा है। वहीं यूपी पुलिस भी इसमें पूरी मदद कर रही है। शराब की बिक्री का आलम यह है कि इसे प्रिंट रेट से 30 रुपये ज्यादा दाम में बेचा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जहां बलिया में हाइवे से दूर शराब की दूकानें खुल रही हैं। वहीं बिहार में शराबबंदी के बाद यूपी के बार्डर वाले इलाकों में शराब की बिक्री बढ़ गई है। ऐसे में शराब के दूकानदारों द्वारा कीमत से अधिक मूल्य पर शराब बेची जा रही है।
दूकानदारों को भी शराब की निकासी से लेकर दूकान तक लाने में नीचे से ऊपर तक अधिकारियों को मोटी रकम देनी पड़ती है। वहीं बाजार में भी समय-समय पर इसको लेकर बवाल होता रहा है। बावजूद इसके विभागीय अफसरों की मिलीभगत से इन शराब दूकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है।
शराब के कारोबार के जानकारों की मानें तो जनपद की अधिकांश शराब की दूकानों पर प्रिंट रेट से ज्यादा पैसा लिया जा रहा है। शराब की पउवा पर कीमत से दस, आधा पर बीस तथा बोतल पर तीस रूपये अधिक ग्राहकों से वसूला जा रहा है।
शराब की मूल्य से अधिक कीमत लेने पर दूकानदारों द्वारा यह कह दिया जाता है कि शराब की निकासी कराते समय ही गोदाम पर सौ रुपये प्रति पेटी के हिसाब से कीमत चुकानी पड़ती है। यदि दूकानदारों द्वारा आनाकानी की जाती है तो उनकी निकासी बंद कर दी जाती है।
शहर के विशुनीपुर में विगत दिनों हो हल्ला के बाद चर्च के समीप से हटाकर टाउन हाल के समीप खोल दिया गया है जहां महावीरी अखाडा निकाला जाता है। यहीं नहीं आबकारी विभाग द्वारा नगर के बहेरी की अंग्रेजी शराब की दूकान को गंगा नदी के पार खोल दिया गया है ताकि बिहार के लोगों को भी यूपी से आसानी से शराब मिल सके।