चक्रपुष्करिणी कुंड पर विराजमान हुई मां मणिकर्णिका की प्रतिमा
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हर-हर महादेव... के जयकारे के साथ मां मणिकर्णिका की जय का घोष मणिकर्णिका की गलियों में गूंज उठा। अक्षय तृतीया पर श्रद्धालुओं को दर्शन देने के लिए मां मणिकर्णिका की डोली यात्रा ब्रह्मनाल से उठाई गई। माता की प्रतिमा को चक्रपुष्करिणी कुंड पर विराजमान करने के बाद पूजन और अनुष्ठान आरंभ हो गया जो तीन घंटे तक अनवरत चलता रहा।
बुधवार की रात 9:30 बजे ग्रहमताल स्थित तीर्थ पुरोहित जयेंद्र नाथ दुबे क्यू महाराज के आवास से मां मणिकर्णिका की अष्टधातु वाली ढाई फीट ऊंची प्रतिमा का पूजन कर उन्हें डोली पर बिराजमान कराया गया। पुरोहित परिवार के 40 सदस्यों ने माता के जयकारे के साथ कांधे पर डोली उठाई। रास्ते भर श्रद्धालु माता की प्रतिमा के दर्शन के लिए जगह-जगह इंतजार कर रहे थे।
मणिकर्णिका माई की अष्टधातु वाली ढाई फीट ऊंची प्रतिमा को तीर्थ कुंड में स्थित 10 फीट ऊंचे पीतल के आसन पर स्थापित किया गया। इसके बाद देवी की फूलों और नए वस्त्रों से झांकी सजाई गई। इसके बाद प्रथम पूज्य के पूजन के बाद ललिता सहस्त्रनाम का पाठ आरंभ हो गया। इसके बाद 11 ब्राज़्मणों ने रुद्राभिषेक किया।
10 बजे आरंभ हुई पूजा रात्रि में एक बजे पूर्ण हुई। माता की प्रतिमा से चक्रपुष्कारणी कुंड का जल रात भर उर्जित होता रहा। एक मई को दोपहर में 12:30 बजे से एक बजे तक माता को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद उत्तराभिमुख गोमुख में अक्षय पुण्य के लिए श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे।
तीर्थ पुरोहित जयेंद्र नाथ दुबे बच्चू महाराज ने बताया कि वर्ष में महज एक दिन मां मणिकर्णिका की शोभायात्रा कुंड तक निकलती है। एक मई को मध्याहन में चक्र पुष्करिणी कुंड में उत्तराभिमुख गोमुख में श्रद्धालु अक्षय पुण्य के लिए स्नान करेंगे।