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लोकसभा चुनाव 2019: अखिलेश होंगे इस सीट के उम्मीदवार, ‘परिवार’ रखेंगे बरकरार!

Fri, 15 Mar 2019 12:25 PM IST
Sayali Maurya प्रदीप मिश्र, अमर उजाला,वाराणसी
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अखिलेश यादव(फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
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पूर्वांचल में 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने जिस एक सीट को जीता था, उससे अब उनके बेटे अखिलेश यादव चुनाव लड़ने जा रहे हैं। सपा इस सीट को पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश के लिए सुरक्षित मान रही है। कहा यह भी जा रहा है कि ऐसा कर अखिलेश पार्टी और गठबंधन के प्रत्याशियों के प्रचार के लिए ज्यादा वक्त भी निकाल पाएंगे। 

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लोकसभा चुनाव 2019 में पहले यहां से कन्नौज सांसद डिंपल यादव को लड़ाने की चर्चा थी लेकिन अब तय हो गया है कि यहां से अखिलेश लड़ेंगे। पार्टी ने शुक्रवार को लखनऊ में बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इसी बैठक में अखिलेश के साथ ही वाराणसी से पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल और बलिया से नीरज शेखर के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। चंदौली सीट के प्रत्याशी पर पेंच फंस गया है।

बसपा से गठबंधन के बाद तय सीटों में सपा ने अब तक जिन सीटों से उम्मीदवार तय किए हैं, उनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मैनपुरी, फिरोजाबाद और बदायूं से ‘यादव परिवार’ के उम्मीदवार घोषित किए जा चुके हैं। बृहस्पतिवार को मुलायम सिंह यादव ने बहू अपर्णा यादव को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ही संभल से टिकट देने की सलाह दी है। इससे पूर्वांचल में परिवार की उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती।

 

उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2019 में 75 सीटें जीतने का एलान करते हुए अमेठी और आजमगढ़ को क्रमश: कांग्रेस और सपा से छीनने की बात कह चुके हैं। इससे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को आशंका थी कि अगर पूर्वांचल से ‘यादव परिवार’ ने चुनाव नहीं लड़ा तो सत्ता पक्ष सपा को ‘रणछोड़’ का मुद्दा गरमाएगा। 2014 में मुलायम सिंह ने मैनपुरी छोड़ने और आजमगढ़ को रखने से कार्यकर्ताओं में सपा के पूर्वांचल प्रेम का संदेश गया था।

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...इसलिए चुन सकते है आजमगढ़ की सीट

जातीय समीकरणों के हिसाब से गठबंधन के बाद 2014 के मुकाबले पूर्वांचल में स्थिति बेहतर मानी जा रही है। वाराणसी से आजमगढ़ तक के नेता और कार्यकर्ता दावा कर रहे हैं कि अखिलेश आजमगढ़ से चुनाव लड़ेंगे। इससे उनको आसपास की एक दर्जन सीटों पर फायदे की भी उम्मीद है।

2017 के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ जिले की 10 में से नौ सीटों पर सपा-बसपा उम्मीदवार जीते थे। आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में तीन पर सपा और दो पर बसपा का कब्जा है। 2014 में बसपा से लड़े शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली मुबारकपुर से विधायक हैं। दूसरी ओर सीट से भाजपा के पास फिलहाल रमाकांत यादव के अलावा मजबूत प्रत्याशी नहीं है।

2014 में दूसरे स्थान पर रहे रमाकांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी रहे हैं। हालांकि रमाकांत प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर कई बार उंगली उठा चुके हैं। बावजूद इसके आसार हैं कि पार्टी उन्हीं पर दांव लगाएगी। अन्यथा की स्थिति में भाजपा ‘हैवीवेट’ उतार सकती है। 

पीएम मोदी से सुरेंद्र सिंह पटेल कर सकते है मुकाबला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुकाबले के लिए सपा सेवापुरी के पूर्व विधायक और मंत्री रहे सुरेंद्र सिंह पटेल को उम्मीदवार बनाने जा रही है। पार्टी का फोकस पटेल मतदाताओं के साथ-साथ पिछड़ों और मुसलमानों पर है। बलिया से नीरज शेखर का नाम भी तय माना जा रहा है।

हालांकि सपा के खाते में आई चंदौली सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के मुकाबले तीसरे स्थान पर रहे पूर्व सांसदों राम किशुन यादव और आनंद रत्न मौर्य के नाम पर पेच फंस गया है।
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सपा के गढ़ में अखिलेश की मांग

वहीं, आजमगढ़ जिले के युवा से लेकर बुजुर्ग एक स्वर में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को आजमगढ़ से चुनाव लड़ने की मांग कर रहे है। सपा नेता एसके सत्येन, सुनील विश्वकर्मा के अलावा शिब्ली कॉलेज के छात्र नेता अखिलेश यादव को आजमगढ़ के सांसद के तौर पर देखना चाहते है।

छात्रों का कहना है कि अखिलेश को जिताने में युवा जी जान लगा देंगे। सपा के जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने बताया कि हम लोग काफी दिनों से मांग कर रहे हैं कि नेता जी के इस सीट से उनके पुत्र अखिलेश यादव ही चुनाव लड़े। 
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