राज्यपाल आनंदी बेन पटेल
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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इक्कीसवीं सदी को ध्यान में रखकर ज्ञान आधारित नीति बनाने की जरूरत है। अखिल भारतीय शिक्षा समागम भारत के नवजागरण में मील का पत्थर साबित होगा। विश्वविद्यालयों को बहुआयामी और बहुविषयी बनाना होगा। विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों को कौशल विकास पर जोर देने की जरूरत है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रहेंगी।
शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष सरकार, अन्नपूर्णा ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को शिक्षा के विकास की दृष्टिकोण से बहुत बड़ा कदम बताते हुए कुलपतियों, आईआईटी निदेशक सहित अन्य शिक्षाविदों से इसके प्रचार-प्रसार के लिए कदम आगे बढ़ाते रहने को कहा। अतिथियों का स्वागत यूजीसी चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार और धन्यवाद ज्ञापन यूजीसी सचिव प्रो. रजनीश जैन ने किया।
शिक्षामंत्री ने कहा कि देश की सभी भाषाएं राष्ट्रीय हैं। भाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है। विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों की कोशिश यही होनी चाहिए कि समाज की जरूरतों पर आधारित शिक्षा का प्रचार, प्रसार करने के लिए अधिक से अधिक लोगों को काम किया जाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति एक वट वृक्ष है और हम सभी की जिम्मेदारी है कि इसका सही से देखभाल करें। जॉब सीकर नहीं बल्कि विश्वविद्यालय जॉब प्रोवाइडर की भूमिका का निर्वहन करें। पांचवीं सदी में तक्षशिला के विनाश से लेकर 19वीं सदी में मैकाले द्वारा उस ज्ञान प्रणाली का विनाश किया गया, जो भारतीय भाषाओं और मूल्यों में हुआ करती थी।