वाराणसी। पांच अक्तूबर को गोदौलिया में हुए बवाल के मामले में फतेहगढ़
सेंट्रल जेल में निरुद्ध कांग्रेस विधायक अजय राय को शनिवार को यहां
एसीजेएम (षष्टम) अंकुर शर्मा की कोर्ट में पेश किया गया। उन्हें फिलहाल
कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल पाई। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने
के बाद कोर्ट ने मामले में सुनवाई की अगली तिथि 10 नवंबर निर्धारित की। साथ
ही, विधायक को आरोप पत्र की प्रति उपलब्ध कराई।
इस दौरान कचहरी परिसर
और उसके आसपास सीमा सुरक्षा बल, पुलिस और पीएसी की कड़ी निगरानी रही। सादी
वर्दी में खुफिया विभाग के जवान भी टोह लेते रहे। वहीं, विधायक के समर्थक
बड़ी संख्या में कचहरी परिसर में मौजूद रहे। फतेहगढ़ सेंट्रल जेल से पेशी
के लिए विधायक अजय राय के यहां कचहरी पहुंचते ही धर्मशील चतुर्वेदी और
हरिशंकर सिंह समेत कई अन्य अधिवक्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया।
वहीं, उनके समर्थन में जमकर नारे लगाए गए। अधिवक्ताओं, समर्थकोें के अलावा
कांग्रेस के पदाधिकारी-कार्यकर्ता भी यहां पहुंचे थे। सभी ने विधायक के साथ
संघर्ष में पूरी एकजुटता के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता जताई। दोपहर
करीब एक बजे पेशी के बाद विधायक को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वापस
फतेहगढ़ सेंट्रल जेल ले जाया गया।
भाजपा-सपा पर साधा निशाना
पेशी के
बाद विधायक अजय राय ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र की भाजपा
सरकार के इशारे पर प्रदेश सरकार विद्वेष की भावना से उनका और कांग्रेस
कार्यकर्ताआें का उत्पीड़न कर रही है। बनारस की जनता की आवाज जब भाजपा ने
कांग्रेस के साथ देखी तो डैमेज कंट्रोल में जुट गई। उसके नेता जनता को
भ्रमित करने में जुट गए। सवाल उठाया कि यदि उनके प्रति जरा सी भी सहानुभूति
थी तो बीजेपी के नेताओं ने पहले आवाज क्यों नहीं उठाई। कहा कि यह सब
बीजेपी का ड्रामा है। बनारस और प्रदेश की जनता भाजपा और सपा के अंदरूनी
गठबंधन को समझ रही है। इसका माकूल जवाब दोनों पार्टियों को 2017 के
विधानसभा चुनाव में मिलेगा। विधायक ने अपने समर्थकों, शुभचिंतकों का आभार
जताते हुए कहा कि न्यायालय में उनका अटूट विश्वास है और इस तरह के उत्पीड़न
से वे विचलित होने वाले नहीं हैं।
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22 के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल, धाराएं बढ़ीं
गोदौलिया
बवाल के मामले में विवेचक क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर संजय राय ने शनिवार
को विधायक अजय राय समेत 22 अन्य आरोपियों के खिलाफ 517 पन्ने का आरोप पत्र
न्यायालय में दाखिल किया। इनमें से छह आरोपी क्रमश: राघवेंद्र चौबे, रमेश
उपाध्याय, विजय पटेल, विकास सिंह, श्रीपति मिश्र और सुभाष यादव फिलहाल
जमानत पर हैं जबकि विधायक समेत 16 आरोपी जेल में हैं। इन सभी पर पुलिस
कर्मियों की पिटाई करने, सरकारी और निजी वाहन फूंकने, दरोगा की पिस्टल सहित
ला एंड ऑर्डर से जुड़े अन्य उपकरण लूटने के आरोप हैं। इन पर अब धारा 34 और
धारा 188 भी बढ़ा दी गई है। भारतीय दंड संहिता की धारा 34 का मतलब कोई भी
आपराधिक कार्य कई व्यक्तियों द्वारा सामान्य आशय के साथ किया जाना जबकि
धारा 188 लोक सेवक द्वारा सम्यक रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा पर लगाई
जाती है। उधर, गोदौलिया बवाल के अन्य 15 आरोपियों को भी जेल से न्यायालय
में प्रस्तुत किया गया और इन सभी मामलों में सुनवाई की अगली तिथि 10 नवंबर
नियत की गई।
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अंशू केशरी और गप्पू सिंह की जमानत खारिज
गोदौलिया
बवाल के मामले में साजिशकर्ता के तौर पर गिरफ्तार किए गए शिव सेना
कार्यकर्ता अंशू केशरी और संतोष सिंह उर्फ गप्पू सिंह की जमानत अर्जी जिला
एवं सत्र न्यायाधीश प्रेम प्रकाश तिवारी की कोर्ट ने शनिवार को खारिज कर
दी। डीजीसी अनिल सिंह ने अभियोजन का पक्ष रखते हुए कहा कि अपराध में
आरोपियों की संलिप्तता और अपराध की गंभीरता को देखते हुए इन्हें जमानत पर
छोड़ा जाना उचित नहीं होगा।