कुछ ऐसी मिली वाराणसी-सोनभद्र में स्वास्थ्य की स्थिति
- 12 महीने तक चले अध्ययन में बच्चों में बिना बलगम वाली खांसी (सूखी खांसी) सबसे आम लक्षण (71 प्रतिशत) के रूप में सामने आई। अन्य आम लक्षणों में बुखार (59.6 प्रतिशत), बलगम वाली खांसी (61.6 प्रतिशत), नाक बहना (58.2 प्रतिशत), और आंखों में जलन (23.2 प्रतिशत) शामिल थे। वहीं वाराणसी में सबसे आम लक्षण बिना बलगम वाली खांसी (37.8 प्रतिशत) था। उसके बाद नाक बहना (29.9 प्रतिशत), बुखार (23.6 प्रतिशत) और दस्त (20.5 प्रतिशत) था। वाराणसी के किसी भी बच्चे में खून वाली खांसी, आंखों में जलन, आंखों में खुजली, आंखों से पानी आना, मसूड़ों में सूजन और त्वचा संबंधी समस्याएं नहीं पाई गईं।
- व्यस्कों के मामले में सोनभद्र में सबसे आम (75.5 प्रतिशत) स्वास्थ्य समस्या सूखी खांसी थी। अन्य आम लक्षणों में खुजली (34.9 प्रतिशत), आंखों में जलन (31 प्रतिशत), सांस लेने में कभी भी संतोषजनक महसूस न होना (29 प्रतिशत) और गैस्ट्रिक एसिडिटी (44.8 प्रतिशत) शामिल थे। वाराणसी में, बलगम रहित खांसी (45.9 प्रतिशत), बुखार (19.4 प्रतिशत), गैस्ट्रिक एसिडिटी (33.9 प्रतिशत) और बलगम वाली खांसी (44.3 प्रतिशत) आम लक्षण थे।
एम्स की रिपोर्ट में जो भी सुझाव दिए गए हैं, उस पर अमल किया जा रहा है। डीएम की तरफ से सभी संबंधितों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सीएमओ को प्रभावित इलाके में विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित कराने के लिए कहा गया है। - आरके सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी।