स्थान : नेत्र रोग और ईएनटी ओपीडी की ओर जाने वाली सड़क
यहां सर पर लाल गमछा रखे एक व्यक्ति हर आते-जाते ऐसे मरीज जिनके हाथ में दवाइयों का पर्चा है। उन्हें टोकता है कि कहां जा रहे हैं। दवाई नहीं लेंगे क्या, यहां अंदर लोगे तो फायदा नहीं करेगी, फिर दौड़ते रहना महीनों इलाज के लिए। कुछ मरीज रुक जाते हैं।
यह व्यक्ति खुद का नाम संजय सिंह बताता है, कहता है कि यह पर्चा लेकर मेरे साथ बाहर चलो तुम्हें 20-25 फीसदी डिस्काउंट दिलवा देंगे। मरीज अगर तैयार हो जाता है तो ठीक है नहीं तो यह डिस्काउंट 30-35 फीसदी भी कर देते हैं। इस तरह से यह यहां दिनभर मरीजों को बरगलाने का काम करते हैं।
उन्हें यहां तक सलाह देते हैं कि डॉक्टर ने एक दवा अतिरिक्त लिख दी है इसकी जरूरत ही नहीं है, इसकी जगह हम आपको सस्ती और अच्छी दवा दिला देंगे। मरीज को भरोसे में लेने के लिए यह तक कह देते हैं कि डॉक्टर ने अपना कमीशन सेट करने के लिए यह दवाई लिखी है, मैं तुम्हें अच्छी दिलवाऊंगा। यह सब रेडियोथेरेपी विभाग के नीचे तक चल रहा है।
स्थान - इमरजेंसी के सामने
इमरजेंसी के बाहर भी दलाल सक्रिय हैं। एक व्यक्ति खुद का नाम पवन बताता है। वह यहां आने-जाने वाले मरीजों पर नजर रखता है, तीमारदारों को बात करते हुए सुनता है। जैसे ही कोई कहता है कि जांच के लिए अगले सप्ताह बुलाया है।
सक्रिय हो जाता है और तत्काल जांच कराने का आश्वासन देता है। यही नहीं आईसीयू में बेड दिलाने से लेकर एमआरआई, अल्ट्रासाउंड समेत अन्य जांच को तत्काल कराने का ठेका लेते हैं। ऐसा इसलिए भी कि बीएचयू में इन जांचों के लिए मरीजों को सात से दस दिन का समय दिया जाता है।
अस्पताल की ओर से इसके पीछे मरीजों की अधिक संख्या का हवाला दिया जाता है लाचार मरीज इन दलालों को चंगुल में फंस जाते हैं। मरीज के भर्ती होने के बाद उनकी दवाइयों तक का ठेका भी यही रखते हैं।
स्थान : सीसीआई लैब के बाहर
सीसीआई लैब के बाहर खून की जांच और माइक्रो बॉयोलाजी जांच के नाम पर भी लोगों को ठगा जा रहा है। यहां खड़े एक व्यक्ति ने अपना नाम प्रमोद बताया। पहले तो वह मरीजों को इस बात पर राजी करने का प्रयास करता है कि लंका पर बाहर चलकर निजी जगह जांच कराएं, तभी रिपोर्ट सही आएगी।
कुछ मरीज तो बहकावे में आ जाते हैं और जो नहीं आते हैं उन्हें कम पैसे और डिस्काउंट का लालच देते हैं। जो लोग तैयार ही नहीं होते हैं उन्हें वहीं बीएचयू में जल्दी जांच कराने के नाम पर ठगा जाता है। इसके पास में ही रेडियोथेरेपी के लिए कैंसर के मरीज आते हैं।
उन्हें रेडियोथेरेपी के नाम पर ठगा जाता है कि वह जल्द ही नंबर दिलवा देंगे मरीज फंस भी जाते हैं क्योंकि बीएचयू में उन्हें आमतौर पर करीब एक से डेढ़ महीने तक का समय मिलता है।
बोले अधिकारी
अस्पताल में आने वाले मरीजों की सुरक्षा के साथ ही दलालों पर अंकुश लगाने के लिए जगह-जगह सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। सीसी कैमरे से भी निगरानी की जाती है। जल्द ही ओपीडी, जांच केंद्र और इमरजेंसी समेत अन्य जगहों पर विशेष अभियान चलाकर दलालों को पकड़ा जाएगा। - प्रो. शिव प्रकाश सिंह, चीफ प्रॉक्टर, बीएचयू