विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस मजबूत दावेदारों को मैदान में उतारने की तैयारी में है। शनिवार को चुनाव के लिए कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यों ने राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में सुबह से शाम तक उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग की। इसके बाद कमेटी के सदस्य दमदार उम्मीदवारों की सूची लेकर रवाना हो गए।
शनिवार को बनारस पहुंचे राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा का एयरपोर्ट पर कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। स्क्रीनिंग कमेटी वहां से चांदपुर स्थित कैंप कार्यालय पर पहुंची। इसके बाद पूर्वांचल के सात जिलों आजमगढ़, मऊ, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली और बनारस के उम्मीदवारों की दावेदारी परखी गई। पहले राउंड में जिला और शहर कांग्रेस कमेटी की ओर से दी गई उम्मीदवारों की सूची पर मुहर लगी और संगठन का फीडबैक लिया गया। इसके बाद आवेदकों को एक-एक करके स्क्रीनिंग कमेटी के सामने पेश किया गया। कमेटी के सदस्यों ने उम्मीदवारों से पूछा कि वह कब से कांग्रेस में हैं और किस विधानसभा से हैं। इसके अलावा पहले कांग्रेस में कौन था, वर्तमान में कौन है और जातिगत समीकरण कैसे हैं।
आठों विधानसभा के मजबूत उम्मीदवारों पर हुई चर्चा
बात करें वाराणसी के आठों विधानसभा की तो पिंडरा से अजय राय, सेवापुरी में आनंद रिंकू, हर्षवर्धन सिंह, शिवपुर से विनोद सिंह कल्लू, अशोक पांडेय, अजगरा सुरक्षित सीट से आशा देवी व अनूप श्रमिक, रोहनिया से राजेश्वर सिंह पटेल, शहर दक्षिणी से सीताराम केशरी, मनीष मोरोलिया, कैंट से रेखा शर्मा, ओमप्रकाश ओझा, प्रिंस राय खगोलन और उत्तरी से मनीष चौबे व हाजी रईस अहमद के नामों पर चर्चा हुई। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने महानगर अध्यक्ष को भी अपनी दावेदारी पेश करने को कहा है। सभी से आह्वान किया कि संगठन में एकजुटता के साथ लगना है और सारे मतभेद भुलाकर चुनाव मैदान में उतरना है।
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चुनाव आयुक्त को भी अपने आवास पर बुलाने लगे हैं पीएम
वाराणसी। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर वाराणसी मंडल के भावी प्रत्याशियों की स्क्रीनिंग की गई है। पार्टी हाईकमान का आदेश है कि महिलाओं की 40 प्रतिशत भागीदारी, युवाओं को मौका और पार्टी के प्रति निष्ठा, सक्रियता और जीत की कसौटी पर हर संभावित उम्मीदवार को परखा गया है। इसी के आधार पर आगे टिकट का बंटवारा होगा। पूरे प्रदेश में सपा नेताओं, पूर्व मंत्रियों के घर छापेमारी के सवाल पर सांसद ने कहा कि भाजपा सरकार जब से आई है तब से ही यह धारणा बन गई है कि यह जो संस्थाएं हैं और जांच एजेंसियों हैं उनका कहीं न कहीं राजनीतिक हस्तक्षेप और राजनीतिक दुरुपयोग किया जा रहा है। यह धारणा जनता के बीच बन गई है। आज जो हुआ उसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है कि क्यों छापेमारी की गई। अब तो चुनाव आयुक्त को भी पीएम अपने आवास पर बुलाने लगे हैं और यह पहली बार हुआ है। ब्यूरो