गाजीपुर जिले के नूरपुर कांड की मजिस्ट्रेटी जांच पूरी हो गई। दो सदस्यों वाली जांच टीम ने रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जिलाधिकारी को सौंप दी। इसे डीएम जल्द शासन को भेजेंगे। जांच अधिकारी जमानिया एसडीएम सत्यप्रिय सिंह और सीओ सुरेश शर्मा ने 15 दिन जांच की। इस दौरान पीड़ित सैनिक परिवार के नौ, 12 पुलिस कर्मियों के अलावा ग्राम प्रधान समेत 35 लोगों के लिखित और मौखिक बयान दर्ज किए गए। इस मामले में कोई भी निर्णय शासन स्तर से लिया जाएगा।
26 जुलाई को नगसर थाना पुलिस झनकू पांडेय उर्फ राजन को थाने ले आ रही थी। उस दौरान वह पुलिस कस्टडी से भाग निकला था। मामले में पुलिस कर्मियों ने नूरपुर गांव के एक सैनिक परिवार के नौ सदस्यों पर अपराधी को शरण लेने का आरोप लगाया था। आरोप है कि इसको लेकर पुलिस ने घर में तोड़फोड़ भी की थी।
फिर थाने लाकर सभी की पिटाई के बाद मुकदमा दर्ज कर चालान कर दिया था। सैनिक परिवार के जमानत पर छूटने के बाद पूरा घटनाक्रम सामने आया। पुलिस कार्रवाई का वीडियो भी वायरल हो गया। तब इस मामले का मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया। वहां से जिलाधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया गया।
इसके बाद डीएम ने अलग से मजिस्ट्रेटी जांच कराई। भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी पीड़ित परिवार का हाल जानने पहुंचे थे। इसमें जनपद के प्रभारी मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला और एमएलसी विशाल सिंह चंचल भी शामिल थे। जमानिया एसडीएम सत्यप्रिय सिंह ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है। सभी अभिलेख सीलबंद कर डीएम को सौंप दिए गए हैं।