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चीन, जापाल के बाद काशी में लहलहाएगी बाकचोई

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किसान अपनी आय को दोगुनी करने के लिए नई तकनीक और नई प्रजाति के बीजों का प्रयोग करके खेती कर रहे हैं। एक ऐसे ही किसान पिंडरा के जगदीशपुर गांव के दीपक राय हैं, जो जिले में पहली बार चीन, जापान सहित देश के कई हिस्सों में उगाई जाने वाली गोभी एक प्रजाति उगा रहे हैं। इसे चीन और जापान में बाकचोई नाम से जाना जाता है। जिसका इस्तेमाल फास्ट फूड, सलाद और सब्जी बनाने में किया जाता है। हरे पत्तेदार गोभी में आयरन और एंटी आक्सिडेंट सहित कई विटामिन होते हैं।
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प्रायोगिक तौर पर डेढ़ विस्वा में तीन हजार पौधे लगाने वाले किसान दीपक राय ने बताया कि गोभी वर्ग की एक प्रजाति है बाकचोई, जो खुले पत्तों वाली गोभी है। भारत के कुछ हिस्सों में इसकी खेती होती है। ऑनलाइन प्लेटफार्म से 500 रुपये का बीज मंगाया था। 30 दिन पहले बीज की नर्सरी डाली थी, जो 20 दिन के बाद ट्रांसप्लांट करने योग्य हो गई। बीएचयू उद्यान विभाग के प्रो. आनंद कुमार सिंह ने बताया कि गोभी सात प्रकार की होती है जिसमें फूल गोभी, फ्रेस्को, गाठ गोभी, ब्रोकली, बंद गोभी की तरह ही पाकचोई भी एक प्रजाति है।
पूर्वांचल में ज्यादातर किसान फूल और बंद गोभी ही उगाते हैं। ब्रोकली, फ्रेस्को जैसी गोभी की अन्य प्रजातियों की बाजार में मांग कम होने से किसान बाकी प्रजातियों को बहुत कम लगाते है।
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- संदीप कुमार गुप्त, जिला उद्यान अधिकारी
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