प्रख्यात ज्योतिषविद और श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय और आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि भारतीय ज्योतिष एवं निर्णय सिंधु ग्रंथ के आधार पर इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी यानी दो मार्च को भद्रा लगने से होलिका दहन में देर होगी।
भद्रा समाप्त होने के बाद रात 12:50 से रात 2:02 बजे के बीच होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ काल है। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि होली के एक दिन पहले 2015 में भी चंद्रग्रहण लगा था, लेकिन तब भारत में दृश्यमान नहीं था। इससे पहले 2006 में होली के एक दिन पहले ग्रहण लगा था। 2006 में ग्रहण भारत में पूर्णत: दिखा था।
48 मिनट ग्रहण
भारत में चंद्रग्रहण 48 मिनट दिखाई देखगा। तीन मार्च फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को चंद्रोदय 5:59 शाम पर होगा। जबकि ग्रहण अपराह्न 3:20 से लगेगा। इसलिए भारत में ग्रहण का प्रारंभ और मध्यकाल नहीं दिखेगा। चंद्रोदय होने के साथ ही ग्रहण दिखाई देने लगेगा। मोक्षकाल शाम को 6:47 बजे तक ग्रहण रहेगा। चंद्रोदय के पहले पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में दिखाई देगा। वहीं, ग्रहण के नौ घंटे पहले यानी तीन मार्च को सुबह 6:20 बजे से सूतक लग जाएगा। मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे।
27 फरवरी को रंगभरी एकादशी और 28 को मसाने की होली
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर रंगभरी एकादशी मनाई जाएगी। बाबा का शृंगार होगा और बाबा की पालकी यात्रा निकालकर गौना की रस्म पूरी की जाएगी। जबकि द्वादशी तिथि यानी 28 फरवरी को मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली खेली जाएगी। श्रीमसाननाथ मंदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारी गुलशन कपूर ने बताया कि मसाने की होली की तैयारी शुरू हो चुकी है।