अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय दंपतियों में लड़कों को गोद लेने की चाह ज्यादा होती है। खासकर ऐसे बच्चे जो गोरे हों और उनमें कोई शारीरिक विकार न हो। वहीं, विदेशियों के लिए ऐसा कोई मापदंड नहीं होता। वे दिव्यांग बच्चों को भी आसानी से अपना लेते हैं। विदेश में चिकित्सा सुविधाएं इतनी उन्नत हैं कि वे दिव्यांग बच्चों का बेहतर इलाज करा लेते हैं। कारा बच्चों को गोद लेने वाले दंपतियों को उनके घर से दूर इसलिए भेजता है ताकि बच्चा बड़ा होने पर अपने असली माता-पिता की तलाश न कर पाए और गोद लेने वाले दंपती को ही अपना माता-पिता समझे।