बीएचयू में हालिया हुए एकेडमिक काउंसिल की बैठक में भी इन खाली सीटों का मुद्दा उठाया गया था जिस पर अधिकारियों का जवाब आया कि कई सीटें ऐसी हैं जो कि हर बार खाली ही रह जाती हैं। ये सीटें एनपीएस यानी कि नॉन परफॉर्मिंग सीट की तरह से हैं। ये समस्या सबसे ज्यादा पीजी दाखिले में आती है। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, वोकेशनल कोर्स, बंगाली और तेलुगु सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं की सीटें खाली रह गईं हैं।
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एसवीडीवी में आरक्षित सीटें यानी कि एससी और एसटी वर्ग की खाली ही रह जाती हैं। दरअसल आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी इन धर्म अनुष्ठान के कोर्स में प्रवेश ही नहीं लेते। लिहाजा हर सत्र में करीब 40 से 50 फीसदी सीटें नहीं भर पातीं। वहीं कोविड के बाद से वोकेशनल कोर्स की सीटों पर प्रवेश कम हो पा रहा है।