इस रिपोर्ट को वाराणसी के डीएम कौशलराज शर्मा को दिया गया और डीएम ने कमिश्नर दीपक अग्रवाल को शासन स्तर तक पहुंचाने के लिए रिपोर्ट भेजी। यह सूचना मिलने के बाद गांव के लोगों में हर्ष है। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि रिपोर्ट राजस्व विभाग को भेजी जाएगी। इस पर शासन स्तर से निर्णय किया जाना है।
मढ़िया गांव के निवासी भूप नारायण झा ने बताया कि काफी लंबे समय से इन आठ गांवों को वाराणसी में शामिल करने के लिए मांग की जा रही है पर कोई सुनता न था। अगर प्रशासन ने कुछ पहल की है तो यह हमारे लिए सुखद है। वाराणसी में शामिल होने के बाद इन गांवों के लोगों की आधी समस्याएं वैसे ही दूर हो जाएंगी।
चौरहट गांव के निवासी कन्हैया पटेल ने कहा कि चंदौली जिले का मुख्यालय से लेकर न्यायालय और जिला अस्पताल भी गांव से 30 किमी की दूरी पर है। जिससे सुविधाएं नहीं मिल पाती। अगर ये गांव वाराणसी में शामिल हो जाते तो राहत मिलती।
राजेश यादव ने कहा कि सूजाबाद नगर पंचायत के साथ इन गांवों को मिला कर नगरपालिका बन जाता है तो और तेजी से विकास हो पता। बहादुरपुर के रविकांत दुबे ने कहा कि हमारा गांव वाराणसी से सटा हुआ है पर जिला बदलने से सुविधाएं नहीं मिलती।
कटेसर के निजामुल हक ने कहा कि थाना, कचहरी, डीएम कार्यालय, पुलिस ऑफिस के साथ सरकारी कार्यालय बनारस अगर किसी कार्य से जाते हैं तो घर का भी काम बाजार से कर के आ सकते हैं। चंदौली जाने में उल्टा पड़ता है। देव कुमार मौर्य ने बताया कि रतनपुर गांव से सटा हुआ डोमरी और सूजाबाद बांव वाराणसी में हैं। वहां काफी सुविधाएं हैं पर हमें यह सुविधाएं नहीं मिल पाती।