चार महीने के लंबे इंतजार के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अनुमोदन पर शासन ने आचार्य पं. अशोक द्विवेदी को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। यह उनकी लगातार दूसरी पारी होगी।
उन्होंने आज अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया। तीन वर्ष के लिए न्यास अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति का आदेश बुधवार को प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) नवनीत सहगल ने जारी किया था।
दोबारा न्यास अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद उन्होंने मंदिर में पुजारियों, कर्मचारियों के लिए आदर्श आचार संहिता बनाने के अलावा विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण की योजना को तेज गति से आगे बढ़ाने की अपनी प्राथमिकता बताई है।
शासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि वह कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष तक न्यास परिषद के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। हालांकि नियम संगत उठाए जाने वाले कदमों और दबाव में फैसले न लेने के लिए उनका गुजरा कार्यकाल घमासान से भरा रहा।
फिल्म अभिनेता डिनो मॉरियो की ऑनलाइन कंपनी आई भक्ति को विश्वनाथ मंदिर में पूजा-आरती का ठेका न देने और पुजारियों-कर्मचारियों के लिए अनुबंध की नियमावली बनाने के अलावा मंदिर में 178 पदों के सृजन की अनुमति न देने के लिए वह विवादों से घिरे रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि बीते 29 अगस्त को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही सीएम के निर्देश पर आचार्य अशोक को अध्यक्ष बनाए जाने की प्रक्रिया शासन ने शुरू कर दी थी। उनके नाम का प्रस्ताव भी मंडलायुक्त ने भेज दिया था लेकिन सपा सरकार और संगठन में उठापटक के चलते फाइल सीएम दफ्तर में ही अटक गई थी।
15 सदस्यीय न्यास परिषद में पांच जनता के बीच से वेद-वेदांग के जानकार व्यक्तियों को सदस्य के दौर पर शासन मनोनीत करता है। इसके अलावा प्रमुख सचिव वित्त, प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य, प्रमुख सचिव संस्कृति, प्रमुख सचिव न्यास, संपूर्णानंद संस्कृति विश्व विद्यालय के कुलपति, शृंगेरी के शंकराचार्य इस न्यास परिषद के मनोनीत सदस्यों में शामिल हैं।