सारनाथ। सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का संदेश लेकर निकाली गई जैन श्वेतांबर तेरापंथ की अहिंसा यात्रा शनिवार की दोपहर गौतम बुद्ध की उपदेशस्थली सारनाथ पहुंची। वहां तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय में तेरापंथ के 11वें आचार्य महाश्रमण ने अहिंसा की साधना को विश्व कल्याण के लिए अनिवार्य बताया। कहा कि पशु, पक्षियों में भी दुख के कारण का समाधान सिर्फ अहिंसा ही है। इसलिए अहिंसा की साधना की जानी चाहिए।
महमूरगंज से सुबह निकली अहिंसा यात्रा दोपहर के वक्त सारनाथ पहुंची। वहां केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के अतिशा हाल में हुई सभा में आचार्य महाश्रमण ने प्राणियों के प्रति मैत्री का भाव पैदा करने की अपील की। कहा कि जैन धर्म में क्षमा- याचना करने का विधान अहिंसा के मार्ग को प्रशस्त करता है । आत्मा में ही हिंसा और अहिंसा दोनों होती है। मनुष्य के अंदर अहिंसा को आत्मसात करने के लिए भाव का पैदा होना जरूरी है। बौद्ध और जैन धर्म दोनों के मार्ग को उन्होंने एक बताया।
तिब्बती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एलएन शास्त्री ने कहा कि सुख सभी को चाहता है पर दुख नहीं। पशु, पक्षी में भी दुख के कारण का समाधान अहिंसा ही है। दुनिया में हिंसा और अहिंसा के मार्ग के फर्क को समझना होगा। संचालन मुनि कुमार ने किया। धन्यवाद प्रकाश किशन लाल डागरिया ने किया।
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करमापा से मिले महाश्रमण, विश्व शांति पर चर्चा
वाराणसी। करजुद्ध संप्रदाय के 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे ने शनिवार की दोपहर जैन श्वेतंबर तेरापंथ के आचार्य महाश्रमण के साथ करीब घंटे भर तक विश्व शांति, कल्याण और अहिंसा पर चर्चा की। सुबह करीब10 बजे पुरातात्विक खंडहर परिसर पहुंचे करमापना ने वहां परिक्रमा के बाद डियर पार्क में हिरनों को फल, सब्जी खिलाया। धमेख स्तूप के पास उन्होंने विश्व शांति के लिए प्राणिधान पूजा भी की। करीब 45 मिनट तक चली पूजा के बाद वो मूलगंध कुटी बिहार पहुंचे। वहां उनका स्वागत भिक्षु सुमितानंद और बिमलरत्न ने खाता भेंट कर किया।