चौकी प्रभारी फुलवरिया सौरभ पांडेय को शुरू से ही शक था कि वारदात को बालिका के मुहल्ले के ही किसी के द्वारा अंजाम दिया गया है। शक के आधार पर बोरिंग का काम करने वाले सनोज की गतिविधि संदिग्ध प्रतीत होने पर उससे पूछताछ शुरू की गई।
पूछताछ में वारदात की गुत्थी परत दर परत सुलझती गई और तीनों आरोपी पकड़े गए। आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली टीम में इंस्पेक्टर कैंट प्रभुकांत के नेतृत्व में इंस्पेक्टर क्राइम विजय कुमार, फुलवरिया चौकी प्रभारी सौरभ पांडेय, दरोगा राकेश कुमार, राजकुमार, वैभव शुक्ला व विवेक सिंह की टीम शामिल थी।
चौकी प्रभारी फुलवरिया सौरभ पांडेय ने बताया कि बालिका का शव मिलने के बाद उसका चचेरा भाई बिलख-बिलख कर रो रहा था। बालिका के पोस्टमार्टम के दौरान वह मोर्चरी में ही मौजूद था और घटना के जल्द खुलासे की मांग कर रहा था। उसके बाद भी वह पुलिस के आगे-पीछे ही लगा रहा और यह शक नहीं होने दिया कि वह भी वारदात को अंजाम देने वाले में से एक है।
सनोज ने पूछताछ में जब अपना अपराध स्वीकार कर लिया तब भी वह पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता रहा। कड़ाई से हुई पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह भी वारदात में शामिल था।
बालिका के लापता होने की सूचना मिलने पर पुलिस ने उसके घर की गली में लगे एक सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को खंगालना शुरू किया। एक फरवरी की सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक की फुटेज खंगालने पर पता लगा कि बालिका अपने घर की गली से बाहर निकली ही नहीं थी।
इसके बाद बालिका का शव उसके घर के बगल में स्थित खंडहर में मिला तो पुलिस को यकीन हो गया कि वारदात को पास-पड़ोस के ही किसी व्यक्ति ने अंजाम दिया है। पुलिस के अनुसार यदि कोई बाहरी व्यक्ति होता तो शव को समीप में ही वरुणा नदी में या फिर कहीं और ठिकाने लगाता। इसी आधार पर बालिका के घर के आसपास रहने वाले संदिग्ध गतिविधियों वाले लोगों से पूछताछ शुरू की गई।