तीस मार्च से हीटवेव चलने के आसार मौसम विभाग ने जताया है, लेकिन अब तक अस्पतालों में अलग वार्ड नहीं बन सका है। ऐसे में अगर अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से पीड़ित मरीज पहुंचते हैं तो उन्हें परेशानी हो सकती है। आम तौर पर गर्मी का मौसम शुरू होने के बाद से अस्पतालों में पेट संबंधी बीमारियों के साथ ही उल्टी, दस्त, डायरिया वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।
हीट स्ट्रोक के भी यही लक्षण हैं। इन दिनों मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, शास्त्री अस्पताल रामनगर, दीनदयाल अस्पताल, स्वामी विवेकानंद अस्पताल भेलूपुर आदि जगहों पर इन दिनों ओपीडी में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें बच्चे भी पहुंच रहे हैं। चिकित्सक भी बच्चों की सेहत पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। इसके बाद भी अब तक अलग वार्ड नहीं बन सका है। मंगलवार को भी अस्पतालों के पर्चा काउंटर से लेकर ओपीडी तक मरीजों की भीड़ रही।
गर्म हवाओं से बचने के लिए चेहरे को ढंका
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पाचन और त्वचा संबंधी बीमारियों के साथ ही मौसमी फ्लू होने का खतरा रहता है। इसके अलावा उल्टी, डायरिया, वायरल फीवर, आंखों का लाल होना, पेट में मरोड़ होना, कमचोरी, चक्कर आने की समस्या भी होने लगती है।
सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि अस्पतालों में हीट स्ट्रोक वार्ड बनाए जाने की तैयारी चल रही है। इस बारे में सीएमएस, एसआईसी को त्वरित कार्रवाई के लिए कहा गया है। वार्ड में मरीजों के इलाज, जांच के साथ ही सभी सुविधाएं रहेंगी। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी हीट स्ट्रोक वाले मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा।