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बीएचयू: अभाविप ने निकाली मशाल यात्रा, चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ नारेबाजी; महिला सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए

Thu, 01 Oct 2026 11:24 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में कथित प्रशासनिक मनमानी, महिला सुरक्षा और छात्र हितों की अनदेखी के विरोध में अभाविप ने मशाल यात्रा निकाली। सेंट्रल ऑफिस से लंका गेट तक निकली यात्रा में छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। परिषद ने लंबित मामलों के निस्तारण, दंडात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा और सुरक्षित, पारदर्शी शैक्षणिक वातावरण की मांग की।
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मशाल यात्रा निकालते बीएचयू के छात्र। - फोटो : संवाद
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बीएचयू में कथित प्रशासनिक मनमानी, महिला सुरक्षा, छात्र हितों की अनदेखी और चीफ प्रॉक्टर के रवैये के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की बीएचयू इकाई ने गुरुवार शाम मशाल यात्रा निकाली। सेंट्रल ऑफिस से शुरू हुई यात्रा लंका गेट तक गई। इसमें बड़ी संख्या में छात्र और परिषद कार्यकर्ता शामिल हुए।

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यात्रा के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और महिला सुरक्षा, मालवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना, छात्र अधिकारों की रक्षा तथा प्रशासनिक जवाबदेही की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की ओर से स्थापित विश्वविद्यालय की मूल भावना, शैक्षणिक गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प दोहराया।

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ऐसे पोस्टर लेकर निकले छात्र। - फोटो : संवाद
अभाविप इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से मांग रखने वाले विद्यार्थियों पर कार्रवाई, छात्र संगठनों के साथ कथित भेदभाव और प्रॉक्टोरियल बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया। साथ ही परिसर में महिला सुरक्षा को लेकर भी सवाल किए।



इकाई मंत्री अनुराग तिवारी ने कहा कि महामना मालवीय ने बीएचयू की कल्पना राष्ट्रनिर्माण, चरित्र निर्माण, भारतीय संस्कृति और उत्कृष्ट शिक्षा के केंद्र के रूप में की थी। उन्होंने छात्रावासों की अव्यवस्था, परिसर की सुरक्षा, प्रॉक्टोरियल बोर्ड की कार्यशैली और विद्यार्थियों के खिलाफ की जा रही दंडात्मक कार्रवाई का मुद्दा उठाया।

एमएमवी तिराहे पर कार्यकर्ताओं ने छात्रसमूह को संबोधित किया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों की समस्याओं का समाधान करने और उनकी लोकतांत्रिक आवाज सुनने की मांग की। परिषद ने लंबित मामलों का निष्पक्ष निस्तारण, आंदोलनरत विद्यार्थियों पर हुई दंडात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा और सुरक्षित व पारदर्शी शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की। अभाविप ने कहा कि विद्यार्थियों की मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक छात्र हितों की आवाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाई जाती रहेगी।
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