रबीश श्रीवास्तव
वाराणसी। विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के पास अपना एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी आईडी) होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत इसकी पहल की गई है।
इसके माध्यम से जहां वह अपने सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक जगह सहेजकर रख सकेंगे। वहीं, इसमें मिलने वाले क्रेडिट का उपयोग दूसरे संस्थानों में जाने पर भी कर सकेंगे। यूजीसी की ओर से एनईपी के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के एबीसी क्रेडिट बनवाने के सुझावों को अब विश्वविद्यालयों में अमल लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसका लाभ यह है कि छात्र एक कार्यक्रम से दूसरे कार्यक्रम में जाने पर भी अपने एकेडमिक बैंक के क्रेडिट का लाभ ले सकते हैं। इससे डिग्री, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा करने में सहूलियत होगी। जल्द ही इसे काशी विद्यापीठ में भी लागू किया जाएगा।
संपूर्णानंद संस्कृत वििव की ओर से छात्रों का एकेडमिक बैंक बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। खास बात यह है कि इसको स्वयं कोर्स से भी जोड़ा गया है। स्वयं प्रोग्राम के नोडल अधिकारी प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने बताया कि हर पाठ्यक्रम का अपना अलग क्रेडिट है। छात्र जिस-जिस पाठ्यक्रम में अध्ययन करेंगे, उसी के आधार पर क्रेडिट का निर्धारण होगा। यह क्रेडिट उनके एकेडमिक बैंक में जमा होते जाएगा। 350 महाविद्यालयों के प्राचार्यों की एक मीटिंग भी शुक्रवार को होगी।