आग की लौ के साथ 15 बार घुमाते हैं दीपदान
आग की लौ के साथ भारी दीपदान को 15 बार घुमाने से शारीरिक अभ्यास भी होता है। सातों अर्चक घड़ी की सुई की दिशा में अलग-अलग कोणों से दीपदान घुमाकर मां गंगा की आरती करते हैं। इसके लिए उन्हें लंबी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। 45 मिनट की आरती में यह सबसे कठिन चरण माना जाता है।
गंगा आरती में है कष्टहरण का गुण: बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि गंगा आरती एक पूर्ण वैदिक प्रक्रिया है। आरती का अर्थ कष्टों का हरण है। इसमें शामिल पूजा की पूर्णता आरती के बाद ही होती है। यह अत्यंत पवित्र कार्य है। सात्विक होना जरूरी है। आरती का स्थान गंगा के सामने ही श्रेयस्कर है।