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मन में श्रद्धा अपार, भक्तों की लगी अटूट कतार

Sat, 29 Oct 2016 02:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा।
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स्कंद पुराण के काशी खंड में कहा गया है कि काशी में पालनहारिणी माता अन्नपूर्णा की कृपा से कोई भूखे पेट नहीं सोता। जगत के पोषण के लिए अन्न-धन से बाबा विश्वनाथ की झोली भरने वाली मां अन्नपूर्णा के दरबार में धनतेरस पर आस्था का ज्वार हिलोरें मारता दिखा। मंदिर जाने वाली सड़कों ने पैदल पथ का रूप ले लिया तो अन्नपूर्णेश्वरी के धाम में सुख-समृद्धि के प्रतीक के तौर पर दोनों हाथों से धन-धान्य का खजाना भी खूब लुटाया गया। श्रद्धालु अपने नयनों में मां की नयनाभिराम मूरत बसाने को आतुर नजर आए।
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धनतेरस पर शुक्रवार को मां अन्नपूर्णा की स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। सड़कों से लेकर संकरी गलियों तक करीब डेढ़ किमी लंबी कतार में लगकर कोई आठ घंटे में मां के दरबार तक पहुंचा तो कोई पांच घंटे में। अन्न-धन का खजाना पाने के लिए दिन भर धक्कामुक्की होती रही। पहले दिन  दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में हाजिरी लगई। स्वर्ण स्वरूपा का दर्शन अन्नकूट तक चार दिन चलेगा। वर्ष में एक बार धनतेरस पर ही इस दरबार के पट खुलते हैं।


मां के खजाने से निकले धन-धान्य से झोली भरने के लिए गुरुवार रात 10 बजे से ही श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी। रात भर भक्त बैरीकेडिंग में लगकर पट खुलने का इंतजार करते रहे। भोर में तीन बजे तक मंदिर परिसर वीआईपी भक्तों की भीड़ से खचाखच भर गया था। चार बजे से महाआरती शुरू हुई। षोडशोपचार पूजन के बाद मां की महाआरती महंत रामेश्वर पुरी ने की। इसके बाद सुबह पांच बजे आम भक्तों के लिए दरबार खोल दिया गया। जयकारे लगने लगे। सुबह आठ बजे तक दशाश्वमेध से लेकर गोदौलिया चौराहा होते हुए बांस फाटक, कोतवालपुरा से ढुंढिराज प्वाइंट तक कहीं तिल रखने की जगह नहीं बची। लकड़ी की अस्थाई सीढ़ियों से होकर भक्त पहली मंजिल पर सजे मां के दरबार में पहुंच रहे थे। अन्नपूर्णा के बाएं महालक्ष्मी और दाएं भूदेवी की झांकी हर किसी का मन मोह रही थी। मां अन्नपूर्णा के सामने कटोरा फैलाए देवाधिदेव महादेव और उसमें अन्न-धन का खजाना प्रदान करती मां की नयनाभिराम झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हो उठे। खजाने के रूप में लावा, सिक्का पाकर भक्तों के चेहरे खिल उठे।
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वहीं, आरोग्य के प्रदाता भगवान धन्‍वंतरि  की पूजा शुक्रवार को विधि-विधान से की गई। सुड़िया स्थित धनवंतरि निवास में अष्टधातु के धनवंतरि की प्रतिमा की झांकी औषधीय पौधों से सजाई गई। इस प्रतिमा के दर्शन के लिए भक्तों का तांता देर रात तक लगा रहा।, राजकीय आयुर्वेद कॉलेज चौकाघाट, बिड़ला अस्पताल सहित कई जगहों पर धन्‍वंतरि का दर्शन-पूजन करने वालों की भीड़ लगी रही। सुड़िया धनवंतरि निवास पर शाम चार बजे से शुरू दर्शन पूजन का दौर देर शाम तक चलता रहा। यहां जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, एसएसपी नितिन तिवारी के साथ ही देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने मत्था टेका। इसके पूर्व आज दोपहर 12 बजे मंदिर का कपाट खोला गया और राजवैद्य पंडित शिव कुमार शास्त्री ने पांच ब्राह्मणों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शास्त्रोक्त विधि से पूजा अर्चन किया। इसके साथ ही वैद्य पं रामकुमार शास्त्री, नंदकुमार शास्त्री, समीर शास्त्री आदि ने भी विधि-विधान से पूजन किया। आयुर्वेद कॉलेज में धन्‍वंतरि जयंती को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रुप में मनाया गया।


प्राचार्य प्रो.एसएन सिंह द्वारा पूजन के बाद आयोजित कार्यशाला में लोगों को मधुमेह रोग के कारण और बचाव के उपाय से जुड़ी जानकारी दी गई। इस दौरान प्रो. नीरज खन्ना, डॉ. चंद्रशेखर पांडेय, डॉ.केके द्विवेदी सहित कई लोग मौजूद रहे। मच्छोदरी स्थित बिड़ला अस्पताल में आयोजित समारोह में आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वैद्य पं कुशल नाथ शर्मा, डॉ. जीपी सिंह, डॉ.पीएस पांडेय, डॉ. दिनेश चौरसिया को बीएचयू के पूर्व चिकित्साधिकारी प्रो. केके त्रिपाठी ने सम्मानित किया। इस दौरान राधेश्याम खेमका, दीनानाथ झुनझुनवाला सहित कई लोग मौजूद रहे। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र पर भी धनवंतरि पूजन हुआ। वहीं, संतुष्टि अस्पताल में डॉ. संजय गर्ग और डॉ. रितु गर्ग ने भी धन्वंतरि पूजन किया।
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