आईएमएस में है मानव संसाधन की कमी
आईएमएस बीएचयू में मानव संसाधन की कमी है। आईएमएस बीएचयू में एम्स की तुलना में फैकेल्टी, जेआर, एसएआर की कमी भी है। जहां एम्स नई दिल्ली में 882 फैकेल्टी हैं, वहीं आईएमएस में 318 जबकि एम्स के 863 सीनियर रेजिडेंट की जगह बीएचयू मेे 212 रेजिडेंट मरीजों की सेवा कर रहे हैं। इसके साथ ही 454 टेिक्क्नकल स्टाफ की जगह बीएचयू में 120, नान टेक्निकल में 324 की जगह बीएचयू में 66 लोग हैं।
प्रो. ओमशंकर बोले-एमओयू जन अधिकारों की जीत, पैसे का होना चाहिए सदुपयोग
आईएमएस बीएचयू में एम्स जैसी सुविधा पर एमओयू को हृदय रोग विभाग के प्रोफेसर ओमशंकर ने जनता के अधिकारों की जीत बताया है। हृदय रोग विभाग में प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रोफेसर ओमशंकर ने कहा कि जनता के स्वास्थ्य के अधिकार की लड़ाई उनके द्वारा वर्ष 2011 से लड़ी जा रही है। धरना, प्रदर्शन, अनशन के माध्यम से जनता के स्वास्थ्य अधिकारों का मुद्दा उठाया गया।
एमओयू से स्वास्थ्य मंत्रालय की भागीदारी से आईएमएस का बजट बढ़ेगा। कहा कि बजट का सही उपयोग होने से ही मरीजों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि एम्स जैसी सुविधा को लेकर 2018 में स्वास्थ्य मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के बीच एमओयू हुआ था। इसके बाद बजट के मामले में शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय दोनों की भागीदारी होने से बजट का वितरण भी सही ढंग से नहीं हो पा रहा था।
अब देशभर में एम्स के संचालन में स्वास्थ्य मंत्रालय की जिस तरह की भागीदारी है, अब ऐसा आईएमएस बीएचयू में भी होगा। कहा कि बीएचयू में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बनी हुई है, उसको दूर करवाने के लिए आंदोलन अभी जारी रहेगा।
एम्स के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाएंगे कदम
आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार का कहना है कि एमओयू के बाद एम्स के मार्गदर्शन में सुविधाओं के साथ ही सभी क्षेत्र में कदम आगे बढ़ाया जाएगा। इस पहल से संस्थान में शिक्षण, पेसेंट केयर, शोध को नई दिशा भी मिलेगी। एम्स के प्रशिक्षक यहां फैकल्टी के साथ ही नान टीचिंग, टीचिंग स्टाफ आदि का मार्गदर्शन करेंगे। इसका लाभ भी मरीजों को मिलेगा।