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चार माह से थाने में सीज बाइक का भी बन गया प्रदूषण मुक्त होने का प्रमाण पत्र

Wed, 11 Dec 2019 11:21 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी मनीष जायसवाल, अमर उजाला, जौनपुर
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थाने में सीज बाइक - फोटो : ं
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अगर आपको वाहन के प्रदूषण मुक्त होने का प्रमाण पत्र बनवाना है तो घबराने की कोई बात नहीं है। मुंहमांगी कीमत दीजिए और घर बैठे ही वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र लीजिए। आपको केंद्र तक न वाहन ले जाना होगा और न ही उसकी जांच करानी होगी।

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पैसे के दम पर सब कुछ ओके हो जाएगा। जी हां, वाहनों के पाल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) प्रमाण पत्र बनाने में यहां बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है। अमर उजाला के स्टिंग में इसका खुलासा है। एआरटीओ के अधीन संचालित संस्था ने ऐसे वाहन का भी प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र बना दिया है, जो महीनों से थाने में सीज है।नया मोटर वाहन एक्ट लागू होने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस, वाहनों के फिटनेस, प्रदूषण प्रमाण पत्र में खामियों को दुरुस्त कराने वालों की संख्या बढ़ी है। भारी भरकम जुर्माने से बचने के लिए लोग कागजातों की कमी को पूरा कराने के लिए संबंधित दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।
 

प्रमाण पत्र - फोटो : ं

वाहनों में प्रदूषण का स्तर तय मानक के नीचे होने का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी होड़ मची हुई है। इसका लाभ लेते हुए संबंधित संस्था की मनमानी भी खूब है। 30-40 रुपये के तय रेट से इतर कई गुना शुल्क लेकर बिना किसी जांच के ही वाहनों के प्रदूषण मुक्त होने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जा रहा है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली इस अनियमितता के प्रति जिम्मेदार भी मूकदर्शक बने हुए हैं। कार्रवाई के लिए उन्हें किसी शिकायतकर्ता का इंतजार है।

सांकेतिक तस्वीर - फोटो : डेमो फोटो

यह है प्रमाण पत्र बनाने के मानक

वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण के दायरे में होने का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वाहन को एआरटीओ कार्यालय की ओर से अधिकृत संस्था के दफ्तर तक ले जाना होता है। संस्था के कर्मचारी वाहन का इंजन स्टार्ट कर उससे निकलने वाले धुएं में कार्बन डाई ऑक्साइड के स्तर का प्रदूषण जांचने वाली मशीन से जांच करते हैं।

प्रमाण पत्र पर इसका उल्लेख रहता है। उन्हीं वाहनों को पाल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) प्रमाण पत्र दिया जाता है, जिनमें कार्बन डाई ऑक्साइड का प्रतिशत कम हो। इससे इतर अधिकांश वाहनों को ही यह सर्टिफिकेट थमा दिया जा रहा है।

ऐसे बना प्रमाण पत्र

अमर उजाला रिपोर्टर पांच दिसंबर को सिपाह स्थित एमएस पूर्वांचल पर्यावरण समिति के कार्यालय पर पहुंचा। बाइक का पीयूसी सर्टिफिकेट बनवाने की बात कही। वहां बैठे युवक ने पूछा कि गाड़ी कहां है। रिपोर्टर ने गाड़ी वाराणसी में होने का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस चेकिंग के नाम परेशान करती है। गाड़ी यहां नहीं आ सकती।

प्रमाण पत्र बनवाने के खर्च से ज्यादा तो पेट्रोल खर्च हो जाएगा। युवक ने पहले ना-नुकूर किया, लेकिन बाद में 40 रुपये के प्रमाण पत्र के बदले 500 रुपये लेने की शर्त पर तैयार हो गया। वाहन के नंबर प्लेट की फोटो उपलब्ध कराने पर तत्काल प्रमाण पत्र जारी कर दिया। जिस पल्सर बाइक (यूपी-62 एएम 8798) को प्रमाण पत्र जारी किया गया, वह राकेश के नाम पर पंजीकृत है। पिछले चार माह से गौराबादशाहपुर थाने में कागजातों के अभाव में सीज है।

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सांकेतिक - फोटो : Amar Ujala

पीयूसी सर्टिफिकेट के लिए वाहन को केंद्र तक लाना और जांच कराना जरुरी है। बिना इसके प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सकता। अगर ऐसे किसी वाहन को प्रमाण पत्र दिया गया है तो पूरी तरह गलत है। जांच कर संस्था के खिलाफ कार्रवाई होगी।
एसपी सिंह, एआरटीओ प्रशासन।

 

संस्था पर प्रमाण पत्र बनवाने के नियम का पूरी तरह पालन होता है। मेरी जानकारी में ऐसा कोई प्रमाण पत्र नहीं बना है। अगर है तो हम पता कराएंगे।
लालचंद यादव, संस्था संचालक।

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