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पूर्वांचल में 25 नदियां सूखीं

Thu, 06 Jun 2013 05:30 AM IST
Varanasi
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वाराणसी। पूर्वांचल में तालाब-पोखरे सूखने के बाद नदियों के दम तोड़ने से हाहाकार मच गया है। गंगा को लेकर देशव्यापी चिंता से जूझ रहीं केंद्र और राज्य की सरकारों की नींद यह जानकर उड़ जाएगी कि वाराणसी से लगे छह जिलों में 42 नदियां सूखने के कगार पर हैं। इनमें से 25 से अधिक नदियों की तलहटी में धूल उड़ रही है। सोनभद्र की नदियों में पानी न होने से पक्षी दम तोड़ने लगे हैं। तटवर्ती इलाकों में खेती प्रभावित हुई है। हालात सुधारने के जल्द ठोस प्रयास नहीं हुए तो स्थिति और भी बदतर हो सकती है।
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गंगा में सिमटाव से वाराणसी शहर में जहां नावों की खेवाई फंसने लगी है, वहीं ग्रामीण इलाकों की छोटी नदियों को लेकर संकट बढ़ गया है। वरुणा में नहर से पानी छोड़े जाने के बाद कुछ इलाकों में पशुओं की प्यास बुझाने में मदद तो मिली लेकिन गोमती, भद्रशिला, मोरवा और नाद के सूख जाने से वहां पशु पालक बेहाल हैं। असि नदी पहले ही नाले में तब्दील हो चुकी है। आजमगढ़ से गुजरी 13 नदियों में से 12 नदियां सूखने के कगार पर हैं। सिर्फ घाघरा में पानी है। तमसा के अलावा मंगई, गांगी, सिलनी, छोटी सरयू, वेसो, कुंवर, उदंती, मझुई नदी के पेटे में दरारें पड़ गई हैं। जौनपुर से गुजरी गोमती में जल प्रवाह कम हो गया है। सई नदी में प्रवाह स्थिर है। वरुणा, पीली तथा बसुही नदियों में पानी ही नहीं है। नहरों से पानी छोड़े जाने के कारण गड्ढों में कहीं-कहीं पानी है।
नक्सल प्रभावित सोनभद्र की 11 नदियों में से नौ सूख चुकी हैं। सिर्फ सोन, कर्मनाशा और घाघर नदी में जल हैै। इनके अलावा बेलन, कनहर, रेणुका, बिजुल, पांडु, ठेमा, अरंगी, सततवाहिनी, लउआ में पानी नहीं है। कर्मनाशा और घाघर के भी जगह-जगह सूखने से क्षेत्र के लोग पानी के लिए जूझने लगे हैं। मिर्जापुर शहर से विंध्याचल तक गंगा के बीच जगह-जगह रेत के टीले उभर आए हैं। गंगा में रेत का ऐसे टीले इससे पहले नहीं देखे गए थे। जिले की गड़ई और कलकलिया नदी से निकली नहरों की तलहटी में धूल उड़ रही है। चंदौली में कर्मनाशा, चंद्रप्रभा और गरई तीनों नदियों का प्रवाह प्रभावित हो गया है। बलुआ, धानापुर में गंगा सूख रही है। बलिया में छोटी और बड़ी नदियाें में भी पानी कम हो गया। मगई नदी बिल्कुल सूख गई है, जबकि टोंस में घुटने भर पानी है। गंगा का जल पेटे में चला गया है। गंगा में पानी कम होने से कोरंटाडीह पंप से बहुत कम पानी छोड़ा जा रहा है। इससे हजारों एकड़ खेत की सिंचाई प्रभावित हो रही है।
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जलाशयों में पानी कम होने से किसान परेशान हैं। जून का पहला हफ्ता चल रहा है लेकिन मिर्जापुर के जमालपुर ब्लाक के पांच हजार एकड़ खेत में नर्सरी डालने की तैयारी तक नहीं शुरू हो पाई। मवेशियाें की प्यास बुझाने में पशुपालकों को काफी दिक्कताें का सामना करना पड़ रहा है। पानी की किल्लत से दुधारू गाय-भैंसों को तरावट नहीं मिल पा रही है। इससे दुग्ध उत्पादन भी प्रभावित हुआ है।
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