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धर्म के नाम पर बिखराव से फैल रहीं कुरीतियां

Tue, 16 Apr 2013 05:30 AM IST
Varanasi
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वाराणसी। शक्तेषगढ़ परमहंस आश्रम के स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने सोमवार को नरिया में कहा कि ईश्वर एक है। जब ईश्वर एक है तो धर्म अनेक कैसे हो सकते हैं। धर्म के नाम पर समाज में जो बिखराव है उसी की वजह से समाज में कुरीतियां फैल रही हैं।
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संत ने कहा कि विभिन्न धर्मों के प्रमुख अंश गीता से ही संकलित किए गए हैं। जिस दिन यथार्थ गीता घर-घर में पहुंच जाएगी, स्कूल-कॉलेज में पढ़ाई जाने लगेगी उस दिन कुरीतियों का खात्मा शुरू होगा और आतंकवाद का भी शमन हो जाएगा। असली भजन वही है जो ईश्वर से मिला दे। इसके लिए किसी तत्वदर्शी महापुरुष के सानिध्य में रहकर चिंतन करना चाहिए। ईश्वर के पथ में जाति, पात, छुआछूत का कोई स्थान नहीं है। जो समर्पण भाव से भगवान की शरण में जाता है उसकी वह मदद करते हैं। सत्संग के मौके पर विपिन सिंह, बाबा सिंह, डब्बू, सरोज सिंह, शैलेश श्रीवास्तव समेत तमाम भक्त उपस्थित थे।
इनसेट
विश्वास नहीं तो प्रेम नहीं
वाराणसी। संत आशुतोष महाराज की शिष्या असीमा भारती ने सोमवार को कहा कि विश्वास नहीं तो प्रेम नहीं हो सकता। प्रेम और विश्वास के बिना भक्ति भी दृढ़ नहीं हो सकती। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से छित्तूपुर में आयोजित पांच दिनी कथा और संकीर्तन के दूसरे दिन उन्होंने सदाचार का पाठ पढ़ाया। संचालन स्वामी अमरेशानंद ने किया। इस मौके पर दिवेशानंद ने भजनों की प्रस्तुति की। स्वामी विश्वनाथन, स्वामी शिव शरणानंद ने उनका साथ दिया।
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