वाराणसी। देश के विभिन्न प्रांतों से जुटे शिक्षक-शिक्षिकाओं ने रविवार को देश में शिक्षा का स्तर ऊंचा करने पर मंथन किया। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शताब्दी भवन में आयोजित अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ के स्वर्ण जयंती सम्मेलन के दूसरे दिन गुणवत्ता युक्त शिक्षा में शिक्षकों की भूमिका पर चरचा हुई।
विभिन्न सत्रों में शिक्षा के बाजारीकरण, वैश्वीकरण पर विमर्श तो हुआ ही विदेशी विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र मेें खुल रहे विश्वविविद्यालयों में अत्यंत महंगी शिक्षा पर भी गहरी चिंता जताई गई। शिक्षकों का तर्क था कि देश की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा मध्यम और निमभन मध्यम वर्ग से संबंध रखता है। ऐसे में महंगी शिक्षा आबादी के बड़े हिस्से को उच्च शिक्षा से वंचित कर देगी। वैश्वीकरण की आड़ में शिक्षा का बाजारीकरण नहीं रोका गया तो इसके घातक परिणाम होंगे। इन विषयों के अतिरिक्त शिक्षकों को मिल रही सुविधाओं और संसाधनों पर भी मंत्रणा की गई। शिक्षक समुदाय ने दोनों में ही वृद्धि किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। महासंघ के अध्यक्ष प्रो. तरुण कुमार पात्रा, महासचिव प्रो. सीके. बर्मन, मणिपुर के सांसद डा. टीम माइरिया, नूपा दिल्ली के निदेशक प्रो. सुधांशु की विशिष्ट उपस्थिति में हुए इन सत्रों में डा. काशीनाथ सिंह, प्रो. मृगयन भट्टाचार्य, डा. डीसी. सिंह, डा. वीरेंद्र सिंह, डा. अशोक पांडेय, डा. रंगनाथ मिश्र, डा. धर्मात्मानंद, डा. एएन. पांडेय आदि ने विचार व्यक्त किए।