वाराणसी। सांस्कृतिक संकुल में आयोजित गांधी शिल्प मेला का समापन मंगलवार को कमिश्नर चंचल कुमार तिवारी के मुख्य आतिथ्य में हुआ। दस दिवसीय शिल्प मेले में 1.70 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। अपने आकर्षक उत्पादों के साथ 20 प्रांतों के कुटीर उद्योगों से जुड़े शिल्पियों ने इसमें भागीदारी की।
समापन समारोह के दौरान शिल्पियों ने कहा कि यह शिल्प मेला शिल्पकारों को अपने उत्पाद बेचने के लिए अच्छा प्लेटफार्म साबित हो रहा है। इस साल एक करोड़ 70 लाख रुपये का कारोबार हुआ है जबकि पिछले साल डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। कमिश्नर ने कहा कि बाबा की नगरी में संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से होने वाले गंगा महोत्सव से वर्ष 1995 में शिल्प मेला को जोड़ा गया था। आज यह मेला राष्ट्रीय स्तर का रूप ले चुका है। मेले में पंजाब, उत्तरांचल, जम्मू, काश्मीर, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, बिहार, मेघालय समेत अन्य प्रांतों के शिल्पियों ने अपने हुनरों से लोगों को खूब लुभाया। बेस्ट सेल के लिए नगीना, बिजनौर के मो. काशिफ को प्रथम पुरस्कार पुरस्कार प्राप्त हुआ। बंगाल की माधवी लता को द्वितीय और गुजरात के नरेश एम शाह को तृतीय पुरस्कार मिला। बेस्ट डिस्प्ले का प्रथम पुरस्कार अगरतला के संजय भौमिक, उड़ीसा के एसके सिराज को द्वितीय एवं दिल्ली के अनिल उग्रेजा को तृतीय पुरस्कार मिला। अतिथियों का स्वागत सहायक निदेशक हथकरघा केपी वर्मा एवं धन्यवाद ज्ञापन उप निदेशक पर्यटन ने किया।