वाराणसी। भगवान धनवंतरि की जयंती पर धनतेरस को काशी जश्न में डूबेगी। सिलसिला शनिवार से ही शुरू हो गया। महामृत्युंजय महादेव मंदिर परिसर में धनवंतरि कूप का जल पीने और ले जाने के लिए दूरदराज से लोग पहुंचे। आयुर्वेद विशेषज्ञों ने धनवंतरि की महिमा का मुक्त कंठ से बखान किया।
सुडि़या में रविवार को चांदी के सिंहासन पर भगवान धनवंतरि की अष्टधातु की प्रतिमा का शृंगार वैद्य पं. शिवकुमार शर्मा करेंगे। विशिष्ट औषधीय पौधों और रसायनों से भगवान धनवंतरि की झांकी सजाई जाएगी। दोपहर एक बजे से ही भगवान धनवंतरि के शृंगार के साथ ही वेदमंत्रों के साथ सोडषोपचार पूजन होगा और प्रतिमा सिंहासन पर प्रतिष्ठापित की जाएगी। शाम पांच बजे से झांकी के कपाट आम भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। रात 10 बजे तक धनवंतरि के नयनाभिराम स्वरूप का दर्शन होगा।