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जगनारायण के इशारे पर नाचते हैं बंदर

Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
Varanasi
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वाराणसी। शहर में बंदरों की टोली ने नाक में दम कर रखा है। रसोई से खाने-पीने का सामान उठा ले जाना। छत पर फैलाए गए कपड़े और सामान तितर-बितर कर देना। यहां तक कि बच्चों और महिलाओं पर हमला करने से भी ये नहीं चूकते, लेकिन कंदवा निवासी जगनारायण गुप्त के इशारे पर बंदर नाचते हैं। उनकी एक पुकार पर सैकड़ों बंदर चले आते हैं। जगनारायण ने यदि कहा लाइन से आओ तो बंदर कतार लगा लेते हैं। खाने को लेकर उनमें चल रहा झगड़ा तक जगनारायण के मना करते ही बंद हो जाता है।
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बीस वर्ष पहले की बात है। जगनारायण किसी परेशानी से जूझ रहे थे। उस दौरान उन्हें किसी ने परेशानी से निजात के लिए बंदरों को चना खिलाने का उपाय बताया। अब क्या वह प्रत्येक मंगलवार को संकट मोचन मंदिर में बंदरों को चना खिलाने लगे। कुछ अंतराल के बाद उनकी परेशानियां तो दूर हो गईं, लेकिन बंदरों से ऐसा लगाव हो गया कि अब वे जगनारायण गुप्ता के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। जगनारायण अब प्रत्येक मंगलवार को बंदरों को कर्दमेश्वर मंदिर में चना खिलाने जाते हैं। हालत यह है कि कर्दमेश्वर मंदिर के पास पहुंचते ही जगनारायण के आसपास झुंड के झुंड बंदर इकट्ठे होकर अपना हिस्सा मांगने लगते हैं। जगनारायण बंदरों की भाषा भी बखूबी समझते हैं। जब वह बंदरों को चना खिलाने लगते हैं तो उनमें आपस में लड़ाई होने लगती है, मगर जगनारायण के डांटते ही बंदर झगड़ा बंद देते हैं। जगनारायण जब बंदरों को लाइन लगाकर आने को कहते है तो सभी क्रमबद्ध होकर आते हैं। वह बदमाशी करने वाले बंदरों की पिटाई भी करते है।
कर्दमेश्वर मंदिर में जरा सा चूकने पर भक्तों के हाथ से प्रसाद लेकर भाग जाने वाले ये बंदर जगनारायण को देखते ही सीधे बन जाते हैं। प्रत्येक मंगलवार को उन्हें ऐसा करते देखने के लिए लोगों की भीड़ एकत्र हो जाती है। जगनारायण से जब बंदरों को चना खिलाने का कारण पूछा गया तो उनका कहना था ऐसा करके हमें मानसिक शांति मिलती है।
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