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तो कैसे होगी उच्चीकृत स्कूलों में पढ़ाई

Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
Varanasi
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वाराणसी। शिक्षकों का संकट झेल रहे राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों की जुलाई से शुरू हो रहे नए सत्र में परेशानी और बढ़ने वाली है। कारण कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश मेें उच्चीकृत 449 मिडिल स्कूलों में प्रधानाचार्य समेत सात शिक्षकों को नियुक्त की जानी है। इधर, जिले से लेकर प्रदेश स्तर पर संचालित राजकीय और सवित्त स्कूलों में शिक्षकों की कमी पहले से है। यदि नए सत्र में इन स्कूलों से शिक्षकों को उच्चीकृत विद्यालयों में भेजा गया तो इसका सीधा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ेगा। शैक्षिक गुणवत्ता तो बाधित होगी ही, पाठ्यक्रम भी समय पर पूरा करने का अतिरिक्त दबाव होगा। जिले में ऐसे छह विद्यालय उच्चीकृत किए गए हैं।
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दरअसल, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत आठवीं पास छात्र-छात्राओं को 10वीं तक की शिक्षा देने के लिए मिडिल स्कूलोें को उच्चीकृत कर 10वीं तक का दर्जा दिया गया। इसमें प्रत्येक विद्यालय पर एक प्रधानाचार्य समेत सात शिक्षकों के पद सृजन की व्यवस्था की गई है। ऐसे में प्रदेश में उच्चीकृत हुए 449 मिडिल स्कूलों में 3143 और शिक्षकों की जरूरत होगी। साथ ही जिले में उच्चीकृत छह स्कूलों भटौली, सगहट, उगापुर, बेसहूपुर, छाही और महगांव में भी 42 शिक्षक नियुक्त किए जाने हैं। शिक्षकों की तैनाती नया सत्र शुरू होने से पहले ही पूरी कर लेनी है। सूत्रों के अनुसार, सवित्त विद्यालयों की तो बात अलग है। राजकीय क्वींस कालेज, जीजीआईसी मलदहिया, पीएन इंटर कालेज रामनगर, जीजीआईसी रामनगर जैसे विद्यालयों में शिक्षकों की काफी कमी है। हर साल उच्चीकृत हो रहे स्कूलों में इन्हीं विद्यालयों से शिक्षकों को भेजा जाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में फिलहाल 700 शिक्षकों की कमी है। इसमें 30 जून तक वाराणसी मंडल में प्रधानाचार्य समेत 327 शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

उच्चीकृत स्कूलों में मंडल स्तर पर राजकीय और सवित्त स्कूलों से शिक्षकों को भेेजा जाता है। चुनाव आचार संहिता के बाद शिक्षकों की कमी को पूरा कर लिया जाएगा - चंद्रजीत सिंह यादव, डीआईओएस
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