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लोकनायक की तपस्थली बेनिया से गूंजेगा शंखनाद

Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST
Varanasi
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वाराणसी। गंगा महामुक्ति संग्राम का शंखनाद लोक नायक जय प्रकाश की तपस्थली बेनियाबाग के मैदान से होगा। 21 मई को महामुक्ति संग्राम की देशव्यापी रणनीति का खुलासा जन संघर्षों के इसी तीर्थ से होगा। उद्यान विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने बेनिया का मैदान गंगा सेवा अभियानम को देने की अनुमति दे दी है। इसी के साथ केदार घाट स्थित विद्यामठ में संग्राम की तैयारियों को अंतिम रूप देने की कोशिशें तेज हो गईं।
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काशी से महामुक्ति संग्राम का उद्घोष करने के लिए टाउनहाल के अलावा बेनियाबाग को पसंद किया गया था। गंगा सेवा अभियान के संतों के साथ महासंग्राम के संयोजक कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्ण ने प्रस्तावित रूपरेखा को अंतिम रूप पहले ही दे दिया था लेकिन स्थान का चयन और अनुमति न मिल पाने की वजह से काम आगे नहीं बड़ पा रहा था। शुक्रवार को अंतत: उद्यान विभाग ने बेनियाबाग के मैदान को संतों के लिए दे दिया। शुल्क जमा कराने के बाद 21 मई को बेनिया का मैदान गंगा सेवा अभियानम के नाम बुक कर लिया गया है। महामुक्ति संग्राम में चारो शंकराचार्य पीठों के प्रतिनिधियों के अलावा संत मोरारी बापू, बाल व्यास पं. श्रीकांत शर्मा, रमेश भाई ओझा भी हिस्सा ले सकते हैं। फिल्म अभिनेता रवि किशन के अलावा शिक्षा, खेल, साहित्य के क्षेत्र से चुनिंदा हस्तियां भी इस संग्राम में हिस्सा ले सकती हैं।

इनसेट
वेद पाठ, श्रीयंत्र पूजन
वाराणसी। वेदमूर्ति श्रीलक्ष्मीकांत पुराणिक के न्तृत्व में शुक्ल यजुर्वेद की काण्व शाखा में सम्मिता पाठ के द्वारा चंद्रमौलिश्वर महादेव का शुक्रवार को रुद्राभिषेक किया गया। जल की अविछिन्न धारा सुबह से शाम चार बजे तक बहती रही। 21 वैदिक आचार्य इसमें शामिल थे। शाम को नारी उत्थान महिला मंडल की ओर से श्रीयंत्र का पूजन किया गया। गंगा मुक्ति के लिए इस पूजन में उर्मिला शुक्ला, नीलम दुबे, रेखा के अलाव तमाम महिलाओं ने ललिता त्रिशती के मंत्र से कुमकुमार्चन किया।
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संदेश
अब मैं भगवान की भक्ति और भागवत कथा के अलावा कुछ भी स्मरण नहीं करना चाहता। इसलिए कि सबकुछ भगवान बर ही छोड़ चाना उचित लगता है।मौन रहने वाले भिक्षु बाबा ने लिखकर दिया संदेश।


सरकार काम रोके, हम तपस्या
वाराणसी। गंगा सेवा अभियानम के सार्वभौम संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र और उत्तराखंड ीक सरकारें गंगा पर प्रस्तावित और अर्धनिर्मित बांधों पर तत्काल काम रोक दें, हम तपस्या रोक देंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम केंद्र की सरकार किसी भी वक्त चाह ले तो उठा सकती है लेकिन साधु-संतों की तपस्या से वह न जाने क्यों मुंह मोड़ रही है। बांधों पर काम रोकने के बाद अभियानम की ओर से आराम से वार्ता की जा सकती है। फिर समाधान की दिशा में चाहे जितना भी वक्त लगे , बैठ कर बात की जा सकती है।
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