आनुवंशिक बीमारियाें पर नियंत्रण के लिए बीएचयू कुलपति की नई पहल
बनारस के दो से अधिक पत्रकार बने जीनोम फाउंडेशन के सदस्य
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। दुनिया में लगभग पांच हजार आनुवंशिक बीमारियां हैं। इसका कारण है जीन। यदि रोग के लिए उत्तरदायी जीन का बचपन में ही पता लग जाए तो भविष्य में होने वाली बीमारियों की जानकारी मिल जाएगी। इससे समय रहते इलाज हो सकेगा। आनुवंशिक बीमारियाें की शुरुआत में ही पहचान के उद्देश्य से देश के प्रत्येक जिले में जीनोम सेंटर स्थापित करने की पहल हो रही है। यह पहल शुरू की है डीएनए फिंगर प्रिंटिंग के विशेषज्ञ और बीएचयू के कुलपति डा. लालजी सिंह ने। इसके लिए उन्होंने जीनोम फाउंडेशन की स्थापना की है। कोई भी व्यक्ति एक रुपये या फिर स्वेच्छा से इससे अधिक धन देकर इसका सदस्य बन सकता है। रविवार को बनारस के दो सौ से अधिक पत्रकारों ने फाउंडेशन की सदस्यता ग्रहण की। फाउंडेशन के सदस्य या उनके परिजन जीनोम सेंटर की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
बीएचयू के सेंट्रल कार्यालय के सभागार में कुलपति ने पत्रकारों को बताया कि जीनोम फाउंडेशन स्थापित करने की इच्छा उनके मन में उस समय आई जब झांसी, गोरखपुर और कर्नाटक के कोलार जिले के कई गांवाें में ऐसे परिवारों की पीड़ा देखी जो पीढ़ी दर पीढ़ी विकलांगता का दंश झेलनी को अभिशप्त है। इन परिवारों पर अध्ययन करने से पता चला कि यह बीमारी वंशानुगत है और इसके लिए जीन जिम्मेदार है। ऐसे में उन परिवार को सलाह दी गई कि शादी करते समय यह ध्यान रखा जाए कि लड़का और लड़की दोनाें विकलांग न हों। कुलपति ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में ऐसे सेंटर स्थापित किए जाएं तो भारत से ऐसी बीमारियाें को खत्म किया जा सकता है। बताया कि फाउंडेशन का मुख्यालय हैदराबाद में है। जबकि जौनपुर के कलवारी शेरवां, कर्नाटक के कोलार में जीनोम सेंटर स्थापित हो चुके हैं। गुजरात, उत्तराखंड और झारखंड से भी सेंटर स्थापित करने के लिए प्रस्ताव आए हैं। फाउंडेशन के चेयरमैन प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार सी. रंगराजन हैं। कुलपति ने बताया कि हीमोफीलिया, विकलांगता जैसी बीमारियों के इलाज में ये सेंटर काफी कारगर हाेंगे। कहा कि आने वाले दिनों में दवाओं का स्वरूप बदल जाएगा। भविष्य में जीन के मुताबिक मरीज को दवाएं देंनी होगी। इसमें आयुर्वेदिक दवाएं काफी कारगर हो सकती हैं। स्टेम सेल विधि से उपचार को उन्हाेंने काफी महंगा बताया लेकिन जीनोम और स्टेम सेल विधि से एक साथ उपचार पर सहमति भी जताई।