वाराणसी। कंपनियां अब पैकिंग पर अनस्टैंडर्ड साइज लिखकर नहीं बच पाएंगी। पहली जुलाई से सभी कंपनियों के लिए स्टैंडर्ड साइज में उत्पादों की पैकिंग करना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों के मुताबिक स्टैंडर्ड साइज में पैकिंग न कर पाने वाली कंपनियों को अब तक अनस्टैंडर्ड साइज लिखने की छूट थी। ऐसा करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती थी। ज्यादातर कंपनियां इस छूट का फायदा उठा रही थीं। अब यह छूट खत्म होने जा रही है। निर्धारित वजन या आयतन की पैकिंग ही वैध होगी।
स्टैंडर्ड साइज की पैकिंग न करने वाली कंपनियों के खिलाफ मानक तथा माप सील बंद वस्तु अधिनियम 2011 के तहत कार्रवाई की जाएगी। बाट माप विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में कंपनियों ने दामों में वृद्धि करने के बजाय मनमाने ढंग से उत्पादों की पैकिंग करने का रास्ता निकाल लिया है। कीमत तो वही रहती है पर उत्पाद का वजन कम कर दिया जाता है। कानून से बचने के लिए पैकिंग पर अनस्टैंडर्ड साइज लिख दिया जाता है। कंपनियों की इसी मनमानी पर नकेल की तैयारी की गई है। कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकिंग निर्धारित वजन या आयतन में ही करनी होगी। जैसे बिस्कुट की पैकिंग 25, 50, 75, 100, 150, 200, 250, 300 ग्राम में ही करनी होगी। इससे ऊपर 100 ग्राम के गुणांक में पैकिंग की जा सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि वाशिंग पाउडर की स्टैंडर्ड पैकिंग के लिए 50, 100, 200, 500, 700 ग्राम, एक किग्रा, डेढ़ किग्रा, दो किग्रा, चाय के लिए 25, 50, 100, 125, 250, 500 ग्राम, एक किग्रा, कपड़ा धोने के साबुन के लिए 50, 75, 100, 125, 150, 200, 250, 300 ग्राम वजन निर्धारित है। बाट माप विभाग के सहायक नियंत्रक गुलाब सिंह के मुताबिक सभी उत्पादों की स्टैंडर्ड पैकिंग के लिए मानक निर्धारित हैं। कंपनियों को उसी के अनुरूप पैकिंग करनी होगी। जो कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी उनके खिलाफ एक जुलाई से कार्रवाई होगी।