वाराणसी। बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों से आह्वान किया कि वे आंतरिक ऊर्जा और शक्ति से विश्व के लिए ‘मैन पावर’ तैयार करें। योग्य और मेधावियों की ऐसी पौध तैयार करें जो हर क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करें। कहा कि बीएचयू में इतनी क्षमता है कि वह पूरे दक्षिण एशिया के लिए ‘साफ्ट पावर’ तैयार कर सकता है। इस मुहिम को अमलीजामा पहनाने के लिए उन्होंने च्वाइस बेस्ट क्रेडिट सिस्टम लागू करने की बात कही। साथ ही बीएचयू को विश्व के रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयाें में शामिल कराने का भी उन्होंने संकल्प दोहराया।
बुधवार को स्वतंत्रता भवन में कुलपति प्रो. त्रिपाठी पहली बार संकाय प्रमुखों, विभागाध्यक्षों और विश्वविद्यालय के समस्त अध्यापकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर विभाग एपीआई (अकैडमिक परफारमेंस इंडिकेटर) के साथ ही शोध पर ध्यान दें। विभाग अपने स्तर से शोध के लिए प्रपोजल भेजे। विश्वविद्यालय के विकास के लिये अगर नियमों में संशोधन करना पड़ा तो उसे किया जाएगा। कुलपति ने कहा कि बीएचयू समग्र शिक्षा का बड़ा उदाहरण है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भौतिक एवं दैवीय संस्कृतियों के चलते टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसी परिस्थिति में भारत ही ऐसा राष्ट्र है जो विश्व को मार्ग दिखा सकता है। इसमें बीएचयू की भूमिका अहम होनी चाहिए। महामना के ‘विजन’ और ‘मिशन’ से ही हम विश्व की कठिनाइयों को दूर करने में सक्षम होंगे। प्रारंभ में रेक्टर प्रो. कमलशील ने आगतों का स्वागत किया। संचालन डा. पद्मिनी रविन्द्रनाथ व धन्यवाद ज्ञापन आईएमएस निदेशक प्रो. आरजी सिंह ने दिया। इस अवसर पर कुलसचिव डा. केपी उपाध्याय, वित्त अधिकारी अभय ठाकुर, छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह, चीफ प्राक्टर प्रो. सत्येन्द्र सिंह सहित कई शिक्षक मौजूद थे।
शताब्दी वर्ष के खुलेगा कार्यालय
कुलपति ने अध्यापकों से आह्वान किया कि विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष के लिए कार्यक्रम तैयार करें। सभी विभाग अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वर्ष भर का कार्यक्रम तैयार करें। बताया कि शताब्दी वर्ष के लिए जल्द ही विश्वविद्यालय में कार्यालय खोला जाएगा।