वाराणसी। 12 सूत्री मांगपत्र में समायोजन के मुद्दे को शामिल न करने पर काशी विद्यापीठ के हड़ताली कर्मचारी शनिवार को दो गुटों में बंट गए। इस मसले पर जिन कर्मचारियों का गत वर्ष समायोजन निरस्त हुआ था, उन्होंने नाराजगी जताते हुए खुद को हड़ताल से अलग कर लिया। वहीं, हड़ताल कर रहे नियमित कर्मचारियों ने इसका विरोध किया, जिससे दोनों गुटों में जमकर नोकझोंक हुई।
उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर 5वें दिन भी काशी विद्यापीठ और संस्कृत विश्वविद्यालय के कर्मचारी हड़ताल कर रहे। अवकाश नकदीकरण, चिकित्सा प्रतिपूर्ति देने व वेतन विसंगति को दूर करने आदि मांगों को लेकर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय के नेतृत्व में विद्यापीठ के कर्मचारियों ने धरना दिया। इसी दौरान जिन 88 कर्मचारियों का समायोजन निरस्त हुआ था, उन्होंने महासंघ मांगपत्र पर आपत्ति जताई। इन कर्मचारियों का कहना था कि मांगपत्र में समायोजन के मुद्दे का जिक्र तक नहीं किया गया, इसलिए वे हड़ताल में क्यों शामिल हों। इसी बात पर शुरू हुआ विवाद नोकझोंक तक पहुंच गया। इसके बाद दोनों गुटों ने अलग-अलग धरना दिया। वहीं, संस्कृत विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने भी प्रशासनिक भवन के सामने धरना प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। इधर, अखिल भारतीय विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ के उपाध्यक्ष डॉ. हरिश्चंद्र सिंह ने काशी विद्यापीठ प्रशासन ने सत्र 2013-14 के बीएड के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा कराने की मांग उठाई।