वाराणसी। काशी विश्वनाथ मंदिर लूट-खसोट का अड्डा बन गया है। वीआईपी दर्शन के नाम पर जहां पांच से 10 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं, वहीं दान के रुपये की भी बंटरबांट की जा रही है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सूबे के धर्मार्थ कार्यमंत्री को भेजे पत्र में यह आरोप लगाया है विश्वनाथ गली में रहने वाले संन्यासी रुद्रानंद सरस्वती ने। उनका कहना है कि जुबान बंद रखने के लिए उन्हें धमकी दी जा रही है। सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो किसी भी समय उन पर हमला किया जा सकता है।
खुद को काशीपीठाधीश्वर बताने वाले डी 8/34, शनि चैनल निवासी रुद्रानंद ने राष्ट्रपति को भेजे दो पृष्ठ के 17 बिंदुओं वाले पत्र में मंदिर में व्याप्त दुर्व्यवस्था का एक-एक कर हवाला दिया है। उनका कहना है कि गर्भगृह के पास स्थित ज्ञानवापी कूप पर पंडित के रूप में अड़ी लगाने वाले दलाल कूप का पानी पिलाकर दर्शनार्थियों से ब्राह्मण भोजन के नाम पर 2200 रुपये (चार ब्राह्मणों के भोजन के नाम पर) वसूलते हैं। परिचय पत्र बनवाकर दर्शनार्थियों की जेब पर डाका डालने वालों का अलग समूह सक्रिय है। होटलों और धर्मशालाओं तक पैठ रखने वाले दलालों के इस समूह के सदस्य वीआईपी दर्शन कराने के नाम पर दूर से आने वाले भक्तों से पांच से 10 हजार रुपये तक की वसूली करते हैं। हुंडियों की गिनती करने वालों की भूमिका पर भी रुद्रानंद ने उंगली उठाई है। उनका आरोप है कि हुंडी की गणना में तैनात अधिकारी-कर्मचारी दान के एक से पांच लाख रुपये तक की रकम की बंदरबांट कर लेते हैं। सुरक्षा प्वाइंट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के दुर्व्यवहार के चलते त्रस्त होकर काशी के तमाम नियमित भक्तों ने मंदिर जाना छोड़ दिया है। ऐसे में विश्वनाथ मंदिर में फैली अराजकता की जांच कराकर इस पर शीघ्र रोक लगाई जानी चाहिए। बाबा ने अपने जान-माल की रक्षा की गुहार भी लगाई है। कहा है कि जुबान बंद रखने के लिए प्रलोभन देने के साथ ही इस व्यवस्था से जुड़े कुछ लोग उनका पीछे भी पड़े हैं।
कोट-
मंदिर में वीआईपी दर्शन के नाम पर भक्तों से वसूली के अलावा हुंडी की गिनती के दौरान दान की रकम की हेराफेरी से जुड़ा शिकायती पत्र अभी मुझे प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र मिलने पर इसकी जांच कराने के लिए धर्मार्थ कार्य सचिव को लिखा जाएगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी से भी इस तरह की गड़बड़ी से जुड़ी हकीकत की जानकारी ली जाएगी। आचार्य पं. अशोक द्विवेदी, अध्यक्ष-काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद।