वाराणसी। करीब आठ घंटे की बारिश के बाद जाम पड़े नालों के पानी से असी नदी में उफान आ गया। जल संकट के दौर से गुजर रही गंगा की सहायक वरुणा नदी भी दोनों पाटों को पकड़कर बहने लगी। दोनों नदियों के किनारे बसी बस्तियों में जगह-जगह पानी भरने से जन जीवन पर असर पड़ा है। देर शाम तक इन नदियों के तटवर्ती इलाकों के लोग अवजल के भराव से जूझते रहे।
नालों का बहाव तेज होने के साथ ही सुबह असी नदी में उफान आ गया। कंचनपुर के बाद इस नदी के बेसिन को पाट कर बनाए गए घरों और कॉलोनियों में गंदा पानी घुसने लगा। बीएचयू परिसर से नरिया होते हुए असी नदी में मिले नाले के ओवरफ्लो होने से कई पाश कॉलोनियां भी जलभराव की चपेट में आ गईं। सड़कों से लेकर गलियों तक नालों का गंदा पानी बहने लगा। देर शाम तक ब्रह्मानंद नगर, साकेतनगर, कौशलेश नगर, रोहितनगर, सुंदरपुर-टडिया और इंदिरा नगर में पानी लगा हुआ था। गंगा रक्षा आंदोलन के अध्यक्ष कपींद्र तिवारी ने इसके लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि करोड़ों रुपये खर्च कर असी नदी के बीच सीवर लाइन डाले जाने के परिणाम स्वरूप यह नौबत आई है। सीवर सिस्टम के नाम पर करोड़ों रुपये बहाए गए लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकल सका। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। महामना मालवीय इंस्टीट्यूट एंड टेक्नालॉजी फार गंगा मैनेजमेंट के निदेशक प्रोफेसर यूके चौधरी ने बताया कि असी नदी में नाले का गंदा पानी उफनाने से उनके दफ्तर के आसपास आवागमन प्रभावित हो गया। जलभराव से निबटने के लिए जिला प्रशासन को जल्द कदम उठाना चाहिए। उधर, बारिश के बाद वरुणा नदी में भी नालों का अवजल भर गया। किनारे की बस्तियाें में बारिश के साथ सीवर का पानी भरने से लोग परेशान नजर आए।