वाराणसी। सुखनवर की सातवीं कड़ी में शायरों ने इश्क-मोहब्बत के कलाम से दर्शकों को सराबोर कर दिया। जिंदगी की हकीकत से जुड़ी शायरी ने सभी का दिल जीत लिया। मौका था रविवार को पराड़कर भवन में सेतु सांस्कृतिक केंद्र की ओर से आयोजित गजलों के कार्यक्रम सुखनवर का।
गजलों की महफिल का आगाज साहिल कपिलवस्वी ने अपनी रूमानी शायरी ‘मेरा वादा है न मयखाने कभी जाऊंगा, अपनी आंखों से बस इक बार पिला दे मुझको...’ से किया। डा. मंजरी पांडेय की दिलकश शायरी ‘है हंसी रात बस चले आओ, बहके जज्बात बस चले आओ...’ सुनाकर सभी के दिलों को छू लिया। वहीं अहमद आजमी ने ‘इश्क की राह में जो फना हो गया, उस मुसाफिर को दिल से दुआ दीजिए...’ शमीम अहमद ने अपने कलाम ‘हरे पेड़ कटते चले जा रहे हैं मकानों के जंगल बढ़े जा रहे हैं...’ सुनाकर आज की जमीनी हकीकत से रूबरू कराया। डा. सईद निजामी ने सच्चे इंसान के चरित्र को उजागर करते हुए ‘जो गरीबों की ढाल होता है, वो बशर बेमिसाल होता है...’ सुनाया। अजफर अली ने माहौल की नजाकत को देखते हुए ‘गजल यहां जो सुना रहे हैं, चिराग दिल के जला रहे हैं...’ रूक्कन बनारसी ने अपने कलाम से सभी को खूब हंसाया। अल कबीर ने गरीब आदमी की जिजीविषा, नरोत्तम शिल्पी ने दीवानगी को, मेयार सनेही ने गंगा के हालात पर पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। इसके अलावा परमानंद आनंद, एहसान बख्शी, मोहकम बनारसी, कुंवर सिंह कुंवर, संतोष सरस, समर गाजीपुरी, अभिनव अरूण, सिद्धनाथ शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता साहिल, राशिद नामी ने गजलें सुनाईं। स्वागत और संचालन सलीम रजा एवं धन्यवाद प्रतिमा सिन्हा ने किया।